गणेशजी ॐ नमः शिवाय योगेश्वर श्री शिव
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एक विचार लो . उस विचार को अपना जीवन बना लो - उसके बारे में सोचो उसके सपने देखो , उस विचार को जिवो . अपने मस्तिष्क , मांसपेशियों , नसों , शरीर के हर हिस्से को उस विचार में डूब जाने दो , और बाकी सभी विचारों को किनारे रख दो . यही सफल होने का तरीका है.           ---स्वामी विवेकानन्द

योग

योग क्या है? कोई इसका मतलब चित्तवृति निरोध से बताता है, तो कोई मन को नियंत्रण करने को बताता है, कोई मन के संयम को तो कोई मन को एक वस्तु या ध्येय पर केन्द्रित करना बताता है, कोई मन को भगवान के ध्यान में लगाने को तो कोई मन को कहीं भी नहीं लगाने को योग बताते हैं। इस तरह योग के अनेक अर्थ लगाये जा सकते हैं, मगर गहराई से देखा जाये तो इन सब का योग से सबंध है, कोई भी कार्य अगर ध्यान से, निस्वार्थ भाव से, भगवान को अर्पित करके करें तो योग प्राप्त होगा, इसमें कोई संदेह नहीं है।

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