गणेशजी ॐ नमः शिवाय योगेश्वर श्री शिव
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एक विचार लो . उस विचार को अपना जीवन बना लो - उसके बारे में सोचो उसके सपने देखो , उस विचार को जिवो . अपने मस्तिष्क , मांसपेशियों , नसों , शरीर के हर हिस्से को उस विचार में डूब जाने दो , और बाकी सभी विचारों को किनारे रख दो . यही सफल होने का तरीका है.           ---स्वामी विवेकानन्द

भौतिक जगत में  आयाम (dimension) तीन होतें हैं. किसी भी ठोस वस्तु को 3 विमाओं में माप सकतें हैं. चोथा आयाम कुछ लोग समय को भी मानकर चलतें हैं, मगर मेरे विचार से समय एक ऐसी चीज नहीं है जिसे पकड़ा,मापा, जा सके; इसको स्वयम प्रभु अवतार रूप लिए तो भी इसको वश में नहीं कर सके. वे भी काल के ग्रास बन गए. हम मानव की तो बात ही क्या है? स्पस्टतः आयाम तीन होतें हैं.

भौतिक जगत से अलग अब हम मानसिक जगत की बात करतें है. हम कोई भी भोग प्राप्त करतें हैं तो उसमें भी तीन आयाम होतें हैं. एक हमारा मन, दूसरी वह वस्तु जो हमारे मन से जुडती है. तीसरा.. तीसरा आयाम कोनसा हो सकता है? तीसरा आयाम वह ईश्वरीय शक्ति है जो इन दोनों पर नियंत्रण रखती है. इसकी ओर प्रायः हम ध्यान नहीं देतें हैं.आज हम इसीको भोग से जोड़ेंगे.

हमारी पांचों इन्द्रियां मिलकर एक आयाम बनाती हैं जिसे हम मन कहतें हैं. यही इन्द्रियों का राजा है. दूसरा आयाम वह वस्तु,भाव है जिससे हमारा मन जुढा है. हमें करना यह चाहिए कि किसी भी इंद्री को कोई भी भोग प्राप्त होता है तो उसे खुद भोगने से पहले उसे तीसरे आयाम को अर्पित करो. जी हाँ उस परम तत्व को याद करो. इसको एक उदहारण से समझा जा सकता है.

भोजन करने जा रहें हैं तो सबसे पहला ग्रास उसको अर्पित करो,पहली रोटी गाय को,चिड़िया को, अन्य जंतु को अर्पित करो. उनमें भी उस तत्व का अंश है अतः दुसरे जीव जंतु को अर्पित किया हुआ अंश उसी के पास जाता है.अगर जीव जंतु को ना अर्पित करते हो तो एक भाग अलग रखकर मन से उसे भगवान को या अपने इष्ट को अर्पित करो या मन से इतना ही कह दो कि आओ भगवान जीमो. यानी आपने उस तीसरे तत्व / आयाम को जोड़ लिया, योग कर लिया है. इसी प्रकार सारे कार्यों को उसको अर्पित करो. रात को सोते समय उसे याद करो, समागम से पूर्व उसे याद करके इस आनन्द में उसे भी शामिल करो. बिना तीसरे आयाम के योग सिद्ध होना कठिन है.

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