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निम्न आसनों में से किसी का भी चुनाव कीजिये-
पद्मासन
मत्स्यासन
पर्वतासन
नौकासन
पश्चिमोत्तनासन
शवासन
सुप्तवज्रासन
वज्रासन
मयूरासन
गोरक्षासन या भद्रासन
योगमुद्रासन
अर्धमत्स्येन्द्रासन

पर्वतासन

यदि आप कंधो के दर्द-जकडऩ से परेशान है तो आपके लिए पर्वतासन बहुत अच्छा उपाय है। इस आसन से कंधो की जकडऩ और कंधों के जोड़ों को दर्द दूर होता है। साथ ही साथ रीढ़ के सभी जोड़ों के बीच का तनाव कम होता है।
पर्वतासन की विधि
समतल स्थान पर कंबल या अन्य कपड़ा बिछाकर बैठ जाएं। रीढ़ को सीधा रखें, दोनों हाथों की अंगुलियों को इंटरलॉक करें, हथेली को पलट कर सिर के ऊपर लाएं। पर्वतासन करने के लिए हाथों को ऊपर की ओर खींचे, बाजू सीधा कर लें। कंधे, बाज़ू और पीठ की मांसपेशियों में एक साथ खिंचाव को महसूस करें। इस स्थिति में एक से दो मिनट तक रूकें, गहरी सांस लें और निकालें। अंत में हाथों को नीचे कर लें। पैरों की स्थिति बदिलए और एक बार फिर से पर्वतासन का अभ्यास करें। रीढ़ को हमेशा सीधा रखिए।
लाभ:
पर्वतासन के अभ्यास से कंधो की जकडऩ और कंधों के जोड़ों को दर्द दूर होता है। साथ ही साथ रीढ़ के सभी जोड़ों के बीच का तनाव कम होता है। फलस्वरूप तंत्रिकाओं में एक प्रकार की स्फूर्ति बनी रहती है और मन प्रसन्न रहता है। पर्वतासन करने से ना सिर्फ सांस लेने में अधिक सुविधा होती है, बल्कि फेंफड़ों की क्षमता बढ़ती है. दरअसल जब हाथों को ऊपर की ओर खींचा जाता है तब पेट की मांसपेशियों में हल्का सा खिंचाव बना रहता है और छाती चौड़ी हो जाती है, जिससे फेंफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ जाती है और सांस भरने और निकालने में सुविधा होती है। गर्भवती महिलाएं भी पहले 6 महीने तक इस आसन का अभ्यास कर सकती हैं। इस आसन के अभ्यास से तंत्रिकाओं में चुस्ती स्फूर्ति बनी रहती है।