माँ की इच्छा

_महीने बीत जाते हैं ,_
_साल गुजर जाता है ,_
_वृद्धाश्रम की सीढ़ियों पर ,_
_मैं तेरी राह देखती हूँ।_

_आँचल भीग जाता है ,_
_मन खाली खाली रहता है ,_
_तू कभी नहीं आता ,_
_तेरा मनि आर्डर आता है।_

_इस बार पैसे न भेज ,_
_तू खुद आ जा ,_
_बेटा मुझे अपने साथ ,_
_अपने 🏡घर लेकर जा।_

_तेरे पापा थे जब तक ,_
_समय ठीक रहा कटते ,_
_खुली आँखों से चले गए ,_
_तुझे याद करते करते।_

_अंत तक तुझको हर दिन ,_
_बढ़िया बेटा कहते थे ,_
_तेरे साहबपन का ,_
_गुमान बहुत वो करते थे।_

_मेरे ह्रदय में अपनी फोटो ,_
_आकर तू देख जा ,_
_बेटा मुझे अपने साथ ,_
_अपने 🏡घर लेकर जा।_

_अकाल के समय ,_
_जन्म तेरा हुआ था ,_
_तेरे दूध के लिए ,_
_हमने चाय पीना छोड़ा था।_

_वर्षों तक एक कपडे को ,_
_धो धो कर पहना हमने ,_
_पापा ने चिथड़े पहने ,_
_पर तुझे स्कूल भेजा हमने।_

_चाहे तो ये सारी बातें ,_
_आसानी से तू भूल जा ,_
_बेटा मुझे अपने साथ ,_
_अपने 🏡घर लेकर जा।_

_घर के बर्तन मैं माँजूंगी ,_
_झाडू पोछा मैं करूंगी ,_
_खाना दोनों वक्त का ,_
_सबके लिए बना दूँगी।_

_नाती नातिन की देखभाल ,_
_अच्छी तरह करूंगी मैं ,_
_घबरा मत, उनकी दादी हूँ ,_
_ऐंसा नहीं कहूँगी मैं।_

_तेरे 🏡घर की नौकरानी ,_
_ही समझ मुझे ले जा ,_
_बेटा मुझे अपने साथ ,_
_अपने 🏡घर लेकर जा।_

_आँखें मेरी थक गईं ,_
_प्राण अधर में अटका है ,_
_तेरे बिना जीवन जीना ,_
_अब मुश्किल लगता है।_

_कैसे मैं तुझे भुला दूँ ,_
_तुझसे तो मैं माँ हुई ,_
_बता ऐ मेरे कुलभूषण ,_
_अनाथ मैं कैसे हुई ?_

_अब आ जा तू.._
_एक बार तो माँ कह जा ,_
_हो सके तो जाते जाते_
_वृद्धाश्रम गिराता जा।_
_बेटा मुझे अपने साथ_
_अपने 🏡घर लेकर जा_

शैलपुत्री

वन्दे वांच्छितलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्‌ ।
वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्‌ ॥
देवी दुर्गा के नौ रूप हैं। दुर्गाजी पहले स्वरूप में ‘शैलपुत्री’ के नाम से जानी जाती हैं। शैलपुत्री के पूजन से मूलाधार चक्र जाग्रत होता है। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार यहीं नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम ‘शैलपुत्री’ पड़ा। नवरात्र-पूजन में प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा और उपासना की जाती है। इस प्रथम दिन की उपासना में योगी अपने मन को ‘मूलाधार’ चक्र में स्थित करते हैं। यहीं से उनकी योग साधना का प्रारंभ होता है। 

वृषभ-स्थिता इन माताजी के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएँ हाथ में कमल-पुष्प सुशोभित है। अपने पूर्व जन्म में ये प्रजापति दक्ष की कन्या के रूप में उत्पन्न हुई थीं। तब इनका नाम ‘सती’ था। इनका विवाह भगवान शंकरजी से हुआ था। 

कथा

एक बार प्रजापति दक्ष ने एक बहुत बड़ा यज्ञ किया। इसमें उन्होंने सारे देवताओं को अपना-अपना यज्ञ-भाग प्राप्त करने के लिए निमंत्रित किया, किन्तु शंकरजी को उन्होंने इस यज्ञ में निमंत्रित नहीं किया। सती ने जब सुना कि उनके पिता एक अत्यंत विशाल यज्ञ का अनुष्ठान कर रहे हैं, तब वहाँ जाने के लिए उनका मन विकल हो उठा। अपनी यह इच्छा उन्होंने शंकरजी को बताई। सारी बातों पर विचार करने के बाद उन्होंने कहा- प्रजापति दक्ष किसी कारणवश हमसे रुष्ट हैं। 

अपने यज्ञ में उन्होंने सारे देवताओं को निमंत्रित किया है। उनके यज्ञ-भाग भी उन्हें समर्पित किए हैं, किन्तु हमें जान-बूझकर नहीं बुलाया है। कोई सूचना तक नहीं भेजी है। ऐसी स्थिति में तुम्हारा वहाँ जाना किसी प्रकार भी श्रेयस्कर नहीं होगा।’ शंकरजी के इस उपदेश से सती का प्रबोध नहीं हुआ। पिता का यज्ञ देखने, वहाँ जाकर माता और बहनों से मिलने की उनकी व्यग्रता किसी प्रकार भी कम न हो सकी। उनका प्रबल आग्रह देखकर भगवान शंकरजी ने उन्हें वहाँ जाने की अनुमति दे दी। सती ने पिता के घर पहुँचकर देखा कि कोई भी उनसे आदर और प्रेम के साथ बातचीत नहीं कर रहा है। सारे लोग मुँह फेरे हुए हैं। केवल उनकी माता ने स्नेह से उन्हें गले लगाया।
बहनों की बातों में व्यंग्य और उपहास के भाव भरे हुए थे। परिजनों के इस व्यवहार से उनके मन को बहुत क्लेश पहुँचा। उन्होंने यह भी देखा कि वहाँ चतुर्दिक भगवान शंकरजी के प्रति तिरस्कार का भाव भरा हुआ है। दक्ष ने उनके प्रति कुछ अपमानजनक वचन भी कहे। यह सब देखकर सती का हृदय क्षोभ, ग्लानि और क्रोध से संतप्त हो उठा। उन्होंने सोचा भगवान शंकरजी की बात न मान, यहाँ आकर मैंने बहुत बड़ी गलती की है। 

वे अपने पति भगवान शंकर के इस अपमान को सह न सकीं। उन्होंने अपने उस रूप को तत्क्षण वहीं योगाग्नि द्वारा जलाकर भस्म कर दिया। वज्रपात के समान इस दारुण-दुःखद घटना को सुनकर शंकरजी ने क्रुद्ध हो अपने गणों को भेजकर दक्ष के उस यज्ञ का पूर्णतः विध्वंस करा दिया।

सती ने योगाग्नि द्वारा अपने शरीर को भस्म कर अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया। इस बार वे ‘शैलपुत्री’ नाम से विख्यात हुर्ईं। पार्वती, हैमवती भी उन्हीं के नाम हैं। उपनिषद् की एक कथा के अनुसार इन्हीं ने हैमवती स्वरूप से देवताओं का गर्व-भंजन किया था। 

पार्वती और हेमवती भी इसी देवी के अन्य नाम हैं। शैलपुत्री का विवाह भी भगवान शंकर से हुआ। शैलपुत्री शिवजी की अर्द्धांगिनी बनीं। इनका महत्व और शक्ति अनंत है।
ध्यान
वन्दे वांछितलाभाय चन्द्रर्धकृत शेखराम्। वृशारूढ़ा शूलधरां शैलपुत्री यशस्वनीम्॥
पूणेन्दु निभां गौरी मूलाधार स्थितां प्रथम दुर्गा त्रिनेत्राम्॥
पटाम्बर परिधानां रत्नाकिरीटा नामालंकार भूषिता॥
प्रफुल्ल वंदना पल्लवाधरां कातंकपोलां तुग कुचाम्। कमनीयां लावण्यां स्नेमुखी क्षीणमध्यां नितम्बनीम्॥

स्तोत्र पा
प्रथम दुर्गा त्वंहि भवसागर: तारणीम्। धन ऐश्वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यम्॥
त्रिलोजननी त्वंहि परमानंद प्रदीयमान्। सौभाग्यरोग्य दायनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यहम्॥
चराचरेश्वरी त्वंहि महामोह: विनाशिन। मुक्ति भुक्ति दायनीं शैलपुत्री प्रमनाम्यहम्॥
कवच
ओमकार: में शिर: पातु मूलाधार निवासिनी। हींकार: पातु ललाटे बीजरूपा महेश्वरी॥
श्रींकार पातु वदने लावाण्या महेश्वरी । हुंकार पातु हदयं तारिणी शक्ति स्वघृत। फट्कार पात सर्वागे सर्व सिद्धि फलप्रदा॥ 

समस्याएँ

📘📘 *प्रेरक कथा*📕📕

🐪🐪 सौ ऊंट 🐪🐪

किसी शहर में, एक आदमी प्राइवेट कंपनी में जॉब करता था . वो अपनी ज़िन्दगी से खुश नहीं था , हर समय वो किसी न किसी समस्या से परेशान रहता था .

एक बार शहर से कुछ दूरी पर एक महात्मा का काफिला रुका . शहर में चारों और उन्ही की चर्चा थी.

बहुत से लोग अपनी समस्याएं लेकर उनके पास पहुँचने लगे ,
उस आदमी ने भी महात्मा के दर्शन करने का निश्चय किया .

छुट्टी के दिन सुबह -सुबह ही उनके काफिले तक पहुंचा . बहुत इंतज़ार के बाद उसका का नंबर आया .

वह बाबा से बोला ,” बाबा , मैं अपने जीवन से बहुत दुखी हूँ , हर समय समस्याएं मुझे घेरी रहती हैं , कभी ऑफिस की टेंशन रहती है , तो कभी घर पर अनबन हो जाती है , और कभी अपने सेहत को लेकर परेशान रहता हूँ ….

बाबा कोई ऐसा उपाय बताइये कि मेरे जीवन से सभी समस्याएं ख़त्म हो जाएं और मैं चैन से जी सकूँ ?

बाबा मुस्कुराये और बोले , “ पुत्र , आज बहुत देर हो गयी है मैं तुम्हारे प्रश्न का उत्तर कल सुबह दूंगा … लेकिन क्या तुम मेरा एक छोटा सा काम करोगे …?”

“हमारे काफिले में सौ ऊंट 🐪 हैं ,
मैं चाहता हूँ कि आज रात तुम इनका खयाल रखो …
जब सौ के सौ ऊंट 🐪 बैठ जाएं तो तुम भी सो जाना …”,

ऐसा कहते हुए महात्मा👳 अपने तम्बू में चले गए ..

अगली सुबह महात्मा उस आदमी से मिले और पुछा , “ कहो बेटा , नींद अच्छी आई .”

वो दुखी होते हुए बोला :
“कहाँ बाबा , मैं तो एक पल भी नहीं सो पाया. मैंने बहुत कोशिश की पर मैं सभी ऊंटों🐪 को नहीं बैठा पाया , कोई न कोई ऊंट 🐪 खड़ा हो ही जाता …!!!

बाबा बोले , “ बेटा , कल रात तुमने अनुभव किया कि चाहे कितनी भी कोशिश कर लो सारे ऊंट 🐪 एक साथ नहीं बैठ सकते …

तुम एक को बैठाओगे तो कहीं और कोई दूसरा खड़ा हो जाएगा.

इसी तरह तुम एक समस्या का समाधान करोगे तो किसी कारणवश दूसरी खड़ी हो जाएगी ..

पुत्र जब तक जीवन है ये समस्याएं तो बनी ही रहती हैं … कभी कम तो कभी ज्यादा ….”

“तो हमें क्या करना चाहिए ?” , आदमी ने जिज्ञासावश पुछा .

“इन समस्याओं के बावजूद जीवन का आनंद लेना सीखो …

कल रात क्या हुआ ?
1) कई ऊंट 🐪 रात होते -होते खुद ही बैठ गए ,
2) कई तुमने अपने प्रयास से बैठा दिए ,
3) बहुत से ऊंट 🐪 तुम्हारे प्रयास के बाद भी नहीं बैठे … और बाद में तुमने पाया कि उनमे से कुछ खुद ही बैठ गए ….

कुछ समझे ….??

समस्याएं भी ऐसी ही होती हैं..

1) कुछ तो अपने आप ही ख़त्म हो जाती हैं ,
2) कुछ को तुम अपने प्रयास से हल कर लेते हो …
3) कुछ तुम्हारे बहुत कोशिश करने पर भी हल नहीं होतीं ,

ऐसी समस्याओं को समय पर छोड़ दो …
उचित समय पर वे खुद ही ख़त्म हो जाती हैं.!!

जीवन है, तो कुछ समस्याएं रहेंगी ही रहेंगी ….
पर इसका ये मतलब नहीं की तुम दिन रात उन्ही के बारे में सोचते रहो …

समस्याओं को एक तरफ रखो
और जीवन का आनंद लो…

चैन की नींद सो …

जब उनका समय आएगा वो खुद ही हल हो जाएँगी”…

🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱

*बिंदास मुस्कुराओ 😊क्या ग़म है ..*
*ज़िन्दगी में टेंशन😁 किसको कम है …*

*अच्छा या बुरा तो केवल भ्रम है …*
*जिन्दगी का नाम ही कभी ख़ुशी कभी ग़म है ..*

कलाम की बातें

डॉ० एपीजे अब्दुल कलाम की चन्द लाईनें जो हमे जीवन में हमेशा याद रखनी चाहिए। और हो सके तो उसे अमल भी करना चाहिये।
————————————————

1. जिदंगी मे कभी भी किसी को
बेकार मत समझना,क्योक़ि
बंद पडी घडी भी दिन में
दो बार सही समय बताती है।

2. किसी की बुराई तलाश करने
वाले इंसान की मिसाल उस
मक्खी की तरह है जो सारे
खूबसूरत जिस्म को छोडकर
केवल जख्म पर ही बैठती है।

3. टूट जाता है गरीबी मे
वो रिश्ता जो खास होता है,
हजारो यार बनते है
जब पैसा पास होता है।

4. मुस्करा कर देखो तो
सारा जहाॅ रंगीन है,
वर्ना भीगी पलको
से तो आईना भी
धुधंला नजर आता है।

5..जल्द मिलने वाली चीजे
ज्यादा दिन तक नही चलती,
और जो चीजे ज्यादा
दिन तक चलती है
वो जल्दी नही मिलती।

6. बुरे दिनो का एक
अच्छा फायदा
अच्छे-अच्छे दोस्त
परखे जाते है।

7. बीमारी खरगोश की तरह
आती है और कछुए की तरह
जाती है;
जबकि पैसा कछुए की तरह
आता है और.खरगोश की
तरह जाता है।

8. छोटी छोटी बातो मे
आनंद खोजना चाहिए
क्योकि बङी बङी तो
जीवन मे कुछ ही होती है।

9. ईश्वर से कुछ मांगने पर
न मिले तो उससे नाराज
ना होना क्योकि ईश्वर
वह नही देता जो आपको
अच्छा लगता है बल्कि
वह देता है जो आपके लिए
अच्छा होता है

10. लगातार हो रही
असफलताओ से निराश
नही होना चाहिए क्योक़ि
कभी-कभी गुच्छे की आखिरी
चाबी भी ताला खोल देती है।

11. ये सोच है हम इसांनो की
कि एक अकेला
क्या कर सकता है
पर देख जरा उस सूरज को
वो अकेला ही तो चमकता है।

12. रिश्ते चाहे कितने ही बुरे हो
उन्हे तोङना मत क्योकि
पानी चाहे कितना भी गंदा हो
अगर प्यास नही बुझा सकता
वो आग तो बुझा सकता है।

13. अब वफा की उम्मीद भी
किस से करे भला
मिटटी के बने लोग
कागजो मे बिक जाते है।

14. इंसान की तरह बोलना
न आये तो जानवर की तरह
मौन रहना अच्छा है।

15. जब हम बोलना
नही जानते थे तो
हमारे बोले बिना’माँ’
हमारी बातो को समझ जाती थी।
और आज हम हर बात पर
कहते है छोङो भी ‘माँ’
आप नही समझोंगी।

16. शुक्र गुजार हूँ
उन तमाम लोगो का
जिन्होने बुरे वक्त मे
मेरा साथ छोङ दिया
क्योकि उन्हे भरोसा था
कि मै मुसीबतो से
अकेले ही निपट सकता हूँ।

17. शर्म की अमीरी से
इज्जत की गरीबी अच्छी है।

18. जिदंगी मे उतार चङाव
का आना बहुत जरुरी है
क्योकि ECG मे सीधी लाईन
का मतलब मौत ही होता है।

19. रिश्ते आजकल रोटी
की तरह हो गए है
जरा सी आंच तेज क्या हुई
जल भुनकर खाक हो जाते।

20. जिदंगी मे अच्छे लोगो की
तलाश मत करो
खुद अच्छे बन जाओ
आपसे मिलकर शायद
किसी की तालाश पूरी हो।

दिल में उतरना

👌👌👌👌🌹

*हथौड़े ने चाभी से पूछा कि मैं तुमसे ज्यादा शक्तिशाली हूँ, लेकिन फिर भी मुझे ताला तोड़ने में बहुत समय लगता है और तुम इतनी छोटी हो फिर भी इतनी आसानी से मजबूत ताला कैसे खोल देती हो!*
*चाभी ने मुस्कुरा कर कहा कि तुम प्रहार करते हो लेकिन मैं ताले के अंतर्मन को छूती हूँ और ताला खुल जाया करता है..!!*

☘ _*आप कितने भी शक्तिशाली हों लेकिन जब तक आप लोगों के दिल में नहीं उतरेंगे तो सम्मान अधूरा है!*_
♻♻🌹

स्वास्थ्य की बातें

🎉🎉🎉🎉🎉🎉🎉
आरोग्यम्* –

✅ *सोने के बाद ऐसे उठें*

✏1. अपनी दायीं तरफ घूमें
जब आप उठें, तो अपनी दायीं तरफ घूमें और फिर बिस्तर से बाहर आएं, क्योंकि नींद से उठते समय मेटाबोलिक प्रक्रिया बहुत धीमी होती है। ऐसे में अचानक से बिस्तर छोड़ने पर दिल पर दबाव पड़ेगा।

✏2. अपने हाथों को मसलें
सुबह बिस्तर से उठने से पहले अपने हाथों को मसलें और अपनी हथेलियों को अपनी आँखों पर लगाएं। हथेलियों को मसलने से हाथों में स्थित सभी नाड़ियां सक्रीय हो जाती हैं और आपका सिस्टम जल्दी से सजग हो जाता है।

✏3. मुस्कुराएं
सुबह उठ कर मुस्कुराएं! किसे देख कर? किसी को नहीं! क्योंकि आपका सुबह उठना अपने आप में एक बड़ी बात है। लाखों ऐसे लोग हैं जो कल रात सोये और आज सुबह नहीं उठे, लेकिन आप और मैं सुबह उठ गए। क्या यह बड़ी बात नहीं है? इसलिए मुस्कुराएं।

✏ “`सोने की सही और गलत दिशा“`
आपका दिल आपके शरीर विज्ञान का एक अहम पहलू है। वह स्टेशन जो शरीर में जीवन भरता है, जो अगर न हो, तो कुछ नहीं होता, आपके बाईं ओर से शुरू होता है। भारत में हमेशा यह संस्कृति रही है कि जागने के बाद आपको अपने दाहिनी ओर करवट लेकर फिर बिस्तर छोड़ना चाहिए। जब आपका शरीर आराम की एक खास अवस्था में होता है, तो उसकी मेटाबोलिक क्रिया धीमी हो जाती है। जब आप जागते हैं, तो शरीर अचानक सक्रिय हो जाता है। इसलिए आपको अपने दाहिनी ओर करवट लेकर फिर उठना चाहिए क्योंकि कम मेटाबोलिक सक्रियता में अगर आप अचानक बाईं करवट लेते हैं तो आप अपने दिल के तंत्र पर दबाव डालेंगे।

✏ “`नींद से उठने के बाद यह करें“`
पारंपरिक रूप से आपसे यह भी कहा जाता है कि सुबह उठने से पहले आपको अपनी हथेलियां रगड़नी चाहिए और अपनी हथेलियों को अपनी आंखों पर रखना चाहिए। कहा जाता है कि ऐसा करने पर आपको भगवान दिख सकते हैं। इसका संबंध भगवान के दिखने से नहीं है।
आपके हाथों में नाड़ियों का एक भारी जाल है। अगर आप अपनी हथेलियां रगड़ते हैं, तो सभी नाड़ियां सक्रिय हो जाती हैं और शरीर तत्काल सजग हो जाता है। सुबह जगने पर भी अगर आप सुस्त महसूस करते हैं, तो ऐसा करके देखिए, आपका पूरा शरीर तत्काल सजग हो जाएगा। तत्काल आपकी आंखों और आपकी इंद्रियों के दूसरे पहलुओं से जुड़ी सारी नाड़ियां सजग हो जाती हैं। शरीर को हिलाने से पहले आपका शरीर और दिमाग दोनों सक्रिय होने चाहिए। आपको सुस्त नहीं उठना चाहिए, इसका उद्देश्य यही है।
🎉🎉🎉🎉🎉🎉🎉

हँसो और हँसाओ

*हँसो और हँसाओ*
एक महिला तीन बच्चों के साथ बस में यात्रा कर रही थी।

कंडक्टर:- मैडम इन बच्चों का टिकिट लगेगा, उम्र बताओ?

महिला:- पहले वाले की दो साल, दूसरे वाले की ढाई साल और तीसरे की तीन साल।

कंडक्टर:- मैडम टिकिट चाहे मत लो, पर गैप तो 9 महीने का रखो।

महिला:- कर्मफूटे,
बीच वाला जेठानी का है,
तू टिकिट काट,ज्ञान मत बाँट।
😜😜😜😜😜😜😜😜

सोच का फर्क

एक बार श्री कृष्ण और अर्जुन भ्रमण पर निकले तो उन्होंने मार्ग में एक निर्धन ब्राहमण को भिक्षा मागते देखा….

अर्जुन को उस पर दया आ गयी और उन्होंने उस ब्राहमण को स्वर्ण मुद्राओ से भरी एक पोटली दे दी।

जिसे पाकर ब्राहमण प्रसन्नता पूर्वक अपने सुखद भविष्य के सुन्दर स्वप्न देखता हुआ घर लौट चला।

किन्तु उसका दुर्भाग्य उसके साथ चल रहा था, राह में एक लुटेरे ने उससे वो पोटली छीन ली।

ब्राहमण दुखी होकर फिर से भिक्षावृत्ति में लग गया।अगले दिन फिर अर्जुन की दृष्टि जब उस ब्राहमण पर पड़ी तो उन्होंने उससे इसका कारण पूछा।

ब्राहमण ने सारा विवरण अर्जुन को बता दिया, ब्राहमण की व्यथा सुनकर अर्जुन को फिर से उस पर दया आ गयी अर्जुन ने विचार किया और इस बार उन्होंने ब्राहमण को मूल्यवान एक माणिक दिया।

ब्राहमण उसे लेकर घर पंहुचा उसके घर में एक पुराना घड़ा था जो बहुत समय से प्रयोग नहीं किया गया था,ब्राह्मण ने चोरी होने के भय से माणिक उस घड़े में छुपा दिया।

किन्तु उसका दुर्भाग्य, दिन भर का थका मांदा होने के कारण उसे नींद आ गयी… इस बीच
ब्राहमण की स्त्री नदी में जल लेने चली गयी किन्तु मार्ग में
ही उसका घड़ा टूट गया, उसने सोंचा, घर में जो पुराना घड़ा पड़ा है उसे ले आती हूँ, ऐसा विचार कर वह घर लौटी और उस पुराने घड़े को ले कर
चली गई और जैसे ही उसने घड़े
को नदी में डुबोया वह माणिक भी जल की धारा के साथ बह गया।

ब्राहमण को जब यह बात पता चली तो अपने भाग्य को कोसता हुआ वह फिर भिक्षावृत्ति में लग गया।

अर्जुन और श्री कृष्ण ने जब फिर उसे इस दरिद्र अवस्था में देखा तो जाकर उसका कारण पूंछा।

सारा वृतांत सुनकर अर्जुन को बड़ी हताशा हुई और मन ही मन सोचने लगे इस अभागे ब्राहमण के जीवन में कभी सुख नहीं आ सकता।

अब यहाँ से प्रभु की लीला प्रारंभ हुई।उन्होंने उस ब्राहमण को दो पैसे दान में दिए।

तब अर्जुन ने उनसे पुछा “प्रभु
मेरी दी मुद्राए और माणिक
भी इस अभागे की दरिद्रता नहीं मिटा सके तो इन दो पैसो से
इसका क्या होगा” ?

यह सुनकर प्रभु बस मुस्कुरा भर दिए और अर्जुन से उस
ब्राहमण के पीछे जाने को कहा।

रास्ते में ब्राहमण सोचता हुआ जा रहा था कि “दो पैसो से तो एक व्यक्ति के लिए भी भोजन नहीं आएगा प्रभु ने उसे इतना तुच्छ दान क्यों दिया ? प्रभु की यह कैसी लीला है “?

ऐसा विचार करता हुआ वह
चला जा रहा था उसकी दृष्टि एक मछुवारे पर पड़ी, उसने देखा कि मछुवारे के जाल में एक
मछली फँसी है, और वह छूटने के लिए तड़प रही है ।

ब्राहमण को उस मछली पर दया आ गयी। उसने सोचा”इन दो पैसो से पेट की आग तो बुझेगी नहीं।क्यों? न इस मछली के प्राण ही बचा लिए जाये”।

यह सोचकर उसने दो पैसो में उस मछली का सौदा कर लिया और मछली को अपने कमंडल में डाल लिया। कमंडल में जल भरा और मछली को नदी में छोड़ने चल पड़ा।

तभी मछली के मुख से कुछ निकला।उस निर्धन ब्राह्मण ने देखा ,वह वही माणिक था जो उसने घड़े में छुपाया था।

ब्राहमण प्रसन्नता के मारे चिल्लाने लगा “मिल गया, मिल गया ”..!!!

तभी भाग्यवश वह लुटेरा भी वहाँ से गुजर रहा था जिसने ब्राहमण की मुद्राये लूटी थी।

उसने ब्राह्मण को चिल्लाते हुए सुना “ मिल गया मिल गया ” लुटेरा भयभीत हो गया। उसने सोंचा कि ब्राहमण उसे पहचान गया है और इसीलिए चिल्ला रहा है, अब जाकर राजदरबार में उसकी शिकायत करेगा।

इससे डरकर वह ब्राहमण से रोते हुए क्षमा मांगने लगा। और उससे लूटी हुई सारी मुद्राये भी उसे वापस कर दी।

यह देख अर्जुन प्रभु के आगे नतमस्तक हुए बिना नहीं रह सके।

अर्जुन बोले,प्रभु यह कैसी लीला है? जो कार्य थैली भर स्वर्ण मुद्राएँ और मूल्यवान माणिक नहीं कर सका वह आपके दो पैसो ने कर दिखाया।

श्री कृष्णा ने कहा “अर्जुन यह अपनी सोंच का अंतर है, जब तुमने उस निर्धन को थैली भर स्वर्ण मुद्राएँ और मूल्यवान माणिक दिया तब उसने मात्र अपने सुख के विषय में सोचा। किन्तु जब मैनें उसको दो पैसे दिए। तब उसने दूसरे के दुःख के विषय में सोचा। इसलिए हे अर्जुन-सत्य तो यह है कि, जब आप दूसरो के दुःख के विषय में सोंचते है, जब आप दूसरे का भला कर रहे होते हैं, तब आप ईश्वर का कार्य कर रहे होते हैं, और तब ईश्वर आपके साथ होते हैं।

सीखो

⚡⚡🌩⛈🌧🌦☁⚡⚡

*कर्मों की आवाज़*
*शब्दों से भी ऊँची होती है…!*
*”दूसरों को नसीहत देना*
*तथा आलोचना करना*
*सबसे आसान काम है।*
*सबसे मुश्किल काम है*
*चुप रहना और*
*आलोचना सुनना…!!”*
*यह आवश्यक नहीं कि*
*हर लड़ाई जीती ही जाए।*
*आवश्यक तो यह है कि*
*हर हार से कुछ सीखा जाए*

6 बातें

*6 छोटी-छोटी कहानियाँ*

( 1 )

*एक बार गाँव वालों ने यह निर्णय लिया कि बारिश ☔के लिए ईश्वर से प्रार्थना🙏 करेंगे , प्रार्थना के दिन सभी गाँव वाले एक जगह एकत्रित हुए , परन्तु एक बालक🙇 अपने साथ छाता 🌂भी लेकर आया ।*
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*🔔 इसे कहते हैं 🔔*
*🎄 आस्था🎄*

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( 2 )

*👶जब आप एक बच्चे को हवा में उछालते हैं तो वह हँसता 😀 है , क्यों कि वह जानता है कि आप उसे पकड़ लेंगे ।*
👇

*🐾इसे कहते हैं🐾*
*✌ विश्वास✌*

🌾
( 3 )

*🌜प्रत्येक रात्रि को जब हम सोने के लिए जाते हैं तब इस बात की कोई गारण्टी नहीं है कि सुबह☀ तक हम जीवित रहेंगे भी कि नहीं , फिर भी हम घड़ी ⏰ में अलार्म लगाकर सोते हैं ।*
👇
*💡इसे कहते हैं*
*🌞आशा(उम्मीद)🌞*

🌾
( 4 )

*हमें भविष्य के बारे में कोई जानकारी नहीं है फिर भी हम आने वाले कल के लिए बड़ी बड़ी योजनाएं बनाते हैं ।*

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*👉 इसे कहते हैं👈*
*💪 आत्मविश्वास💪*
—————————————
🌾
( 5 )
*💞 हम देखरहे हैं कि दुनियाँ कठिनाइयों से जूझरही है फिर भी हम शादी 🎎 करते हैं ।*
👇
*🎵 इसे कहते हैं 🎵*
*💘 प्यार 💘*

🌾
( 6 )

*👍 एक 60 साल की उम्र वाले व्यक्ति की शर्ट पर एक शानदार वाक्य लिखा था , “मेरी उम्र 60 साल नहीं है , मैं तो केवल मधुर – मधुर 16 साल का हूँ , 44 साल के अनुभव के साथ ।”*

👇
*👊 इसे कहते हैं 👊*
*👀 नज़रिया 👀*
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*जीवन खूबसूरत है , इसे सर्वोत्तम के लिए जियो।*

*संसार में केवल मनुष्य ही ऐसा एकमात्र प्राणी है*
*जिसे ईश्वर ने हंसने का गुण दिया है, इसे खोईए मत.*

*”बिखरने दो होंठों पे हंसी के फुहारों को*
*दोस्तों,*
*प्यार से बात कर लेने से जायदाद कम नहीं होती है*

*इन्सान तो हर घर में पैदा होते हैं….!!*
*बस इंसानियत कहीं-कहीं जन्म लेती है.*