दिवाली

जब मन में हो मौज बहारों की
चमकाएँ चमक सितारों की,
जब ख़ुशियों के शुभ घेरे हों
तन्हाई में भी मेले हों,
आनंद की आभा होती है
*उस रोज़ ‘दिवाली’ होती है ।*

जब प्रेम के दीपक जलते हों
सपने जब सच में बदलते हों,
मन में हो मधुरता भावों की
जब लहके फ़सलें चावों की,
उत्साह की आभा होती है
*उस रोज़ दिवाली होती है ।*

जब प्रेम से मीत बुलाते हों
दुश्मन भी गले लगाते हों,
जब कहींं किसी से वैर न हो
सब अपने हों, कोई ग़ैर न हो,
अपनत्व की आभा होती है
*उस रोज़ दिवाली होती है ।*

जब तन-मन-जीवन सज जाएं
सद्-भाव के बाजे बज जाएं,
महकाए ख़ुशबू ख़ुशियों की
मुस्काएं चंदनिया सुधियों की,
तृप्ति की आभा होती है
*उस रोज़ ‘दिवाली’ होती है .*।

वकील

एक वकील ने दूसरे को कुआँ बेचा।
पहला वकील अगले दिन दूसरे के पास गया और कहा — वकील साहब मैने सिर्फ़ कुआँ बेचा है उसका पानी नही , उसमे से पानी लोगे तो अलग से पैसा लगेगा..

दूसरे वकील ने जवाब दिया– मैं आपके पास आने ही वाला था कि जल्दी से कुएँ से पानी खाली कर लीजिये नही तो कल से किराया लगेगा.. 😂😂

भगवान के तीन रूप

*।।तूलसी वृक्ष ना जानिए,*
*गाय ना जानिए ढौर।।*
*।।माता-पिता मनुष्य ना जानिए,*
*ये तीनों नन्द किशोर।।*

*अर्थात:* तूलसी को कभी वृक्ष नहीं
समझना चाहिए, और गाय को कभी
पशु ना समझे, तथा माता-पिता को
कभी मनुष्य ना समझे, क्योंकि ये तीनो
तो साक्षात भगवान का रूप हैं।

कात्यायनी

माँ दुर्गा के छठे रूप का नाम कात्यायनी है। इनके नाम से जुड़ी कथा है कि एक समय कत नाम के प्रसिद्ध ॠषि थे। उनके पुत्र ॠषि कात्य हुए, उन्हीं के नाम से प्रसिद्ध कात्य गोत्र से, विश्वप्रसिद्ध ॠषि कात्यायन उत्पन्न हुए। उन्होंने भगवती पराम्बरा की उपासना करते हुए कठिन तपस्या की। उनकी इच्छा थी कि भगवती उनके घर में पुत्री के रूप में जन्म लें। माता ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार कर ली। कुछ समय के पश्चात जब महिषासुर नामक राक्षस का अत्याचार बहुत बढ़ गया था, तब उसका विनाश करने के लिए ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने अपने अपने तेज़ और प्रताप का अंश देकर देवी को उत्पन्न किया था। महर्षि कात्यायन ने इनकी पूजा की इसी कारण से यह देवी कात्यायनी कहलायीं।
अश्विन कृष्ण चतुर्दशी को जन्म लेने के बाद शुक्ल सप्तमी, अष्टमी और नवमी, तीन दिनों तक कात्यायन ॠषि ने इनकी पूजा की, पूजा ग्रहण कर दशमी को इस देवी ने महिषासुर का वध किया। इन का स्वरूप अत्यन्त ही दिव्य है। इनका वर्ण स्वर्ण के समान चमकीला है। इनकी चार भुजायें हैं, इनका दाहिना ऊपर का हाथ अभय मुद्रा में है, नीचे का हाथ वरदमुद्रा में है। बांये ऊपर वाले हाथ में तलवार और निचले हाथ में कमल का फूल है और इनका वाहन सिंह है।

ब्रह्मचारिणी

ब्रम्ह्चारिणी
नवरात्र पर्व के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। साधक इस दिन अपने मन को माँ के चरणों में लगाते हैं। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली। इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएँ हाथ में कमण्डल रहता है।
इस दिन साधक कुंडलिनी शक्ति को जागृत करने के लिए भी साधना करते हैं। जिससे उनका जीवन सफल हो सके.
नवरात्र

माँ की इच्छा

_महीने बीत जाते हैं ,_
_साल गुजर जाता है ,_
_वृद्धाश्रम की सीढ़ियों पर ,_
_मैं तेरी राह देखती हूँ।_

_आँचल भीग जाता है ,_
_मन खाली खाली रहता है ,_
_तू कभी नहीं आता ,_
_तेरा मनि आर्डर आता है।_

_इस बार पैसे न भेज ,_
_तू खुद आ जा ,_
_बेटा मुझे अपने साथ ,_
_अपने 🏡घर लेकर जा।_

_तेरे पापा थे जब तक ,_
_समय ठीक रहा कटते ,_
_खुली आँखों से चले गए ,_
_तुझे याद करते करते।_

_अंत तक तुझको हर दिन ,_
_बढ़िया बेटा कहते थे ,_
_तेरे साहबपन का ,_
_गुमान बहुत वो करते थे।_

_मेरे ह्रदय में अपनी फोटो ,_
_आकर तू देख जा ,_
_बेटा मुझे अपने साथ ,_
_अपने 🏡घर लेकर जा।_

_अकाल के समय ,_
_जन्म तेरा हुआ था ,_
_तेरे दूध के लिए ,_
_हमने चाय पीना छोड़ा था।_

_वर्षों तक एक कपडे को ,_
_धो धो कर पहना हमने ,_
_पापा ने चिथड़े पहने ,_
_पर तुझे स्कूल भेजा हमने।_

_चाहे तो ये सारी बातें ,_
_आसानी से तू भूल जा ,_
_बेटा मुझे अपने साथ ,_
_अपने 🏡घर लेकर जा।_

_घर के बर्तन मैं माँजूंगी ,_
_झाडू पोछा मैं करूंगी ,_
_खाना दोनों वक्त का ,_
_सबके लिए बना दूँगी।_

_नाती नातिन की देखभाल ,_
_अच्छी तरह करूंगी मैं ,_
_घबरा मत, उनकी दादी हूँ ,_
_ऐंसा नहीं कहूँगी मैं।_

_तेरे 🏡घर की नौकरानी ,_
_ही समझ मुझे ले जा ,_
_बेटा मुझे अपने साथ ,_
_अपने 🏡घर लेकर जा।_

_आँखें मेरी थक गईं ,_
_प्राण अधर में अटका है ,_
_तेरे बिना जीवन जीना ,_
_अब मुश्किल लगता है।_

_कैसे मैं तुझे भुला दूँ ,_
_तुझसे तो मैं माँ हुई ,_
_बता ऐ मेरे कुलभूषण ,_
_अनाथ मैं कैसे हुई ?_

_अब आ जा तू.._
_एक बार तो माँ कह जा ,_
_हो सके तो जाते जाते_
_वृद्धाश्रम गिराता जा।_
_बेटा मुझे अपने साथ_
_अपने 🏡घर लेकर जा_

शैलपुत्री

वन्दे वांच्छितलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्‌ ।
वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्‌ ॥
देवी दुर्गा के नौ रूप हैं। दुर्गाजी पहले स्वरूप में ‘शैलपुत्री’ के नाम से जानी जाती हैं। शैलपुत्री के पूजन से मूलाधार चक्र जाग्रत होता है। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार यहीं नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम ‘शैलपुत्री’ पड़ा। नवरात्र-पूजन में प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा और उपासना की जाती है। इस प्रथम दिन की उपासना में योगी अपने मन को ‘मूलाधार’ चक्र में स्थित करते हैं। यहीं से उनकी योग साधना का प्रारंभ होता है। 

वृषभ-स्थिता इन माताजी के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएँ हाथ में कमल-पुष्प सुशोभित है। अपने पूर्व जन्म में ये प्रजापति दक्ष की कन्या के रूप में उत्पन्न हुई थीं। तब इनका नाम ‘सती’ था। इनका विवाह भगवान शंकरजी से हुआ था। 

कथा

एक बार प्रजापति दक्ष ने एक बहुत बड़ा यज्ञ किया। इसमें उन्होंने सारे देवताओं को अपना-अपना यज्ञ-भाग प्राप्त करने के लिए निमंत्रित किया, किन्तु शंकरजी को उन्होंने इस यज्ञ में निमंत्रित नहीं किया। सती ने जब सुना कि उनके पिता एक अत्यंत विशाल यज्ञ का अनुष्ठान कर रहे हैं, तब वहाँ जाने के लिए उनका मन विकल हो उठा। अपनी यह इच्छा उन्होंने शंकरजी को बताई। सारी बातों पर विचार करने के बाद उन्होंने कहा- प्रजापति दक्ष किसी कारणवश हमसे रुष्ट हैं। 

अपने यज्ञ में उन्होंने सारे देवताओं को निमंत्रित किया है। उनके यज्ञ-भाग भी उन्हें समर्पित किए हैं, किन्तु हमें जान-बूझकर नहीं बुलाया है। कोई सूचना तक नहीं भेजी है। ऐसी स्थिति में तुम्हारा वहाँ जाना किसी प्रकार भी श्रेयस्कर नहीं होगा।’ शंकरजी के इस उपदेश से सती का प्रबोध नहीं हुआ। पिता का यज्ञ देखने, वहाँ जाकर माता और बहनों से मिलने की उनकी व्यग्रता किसी प्रकार भी कम न हो सकी। उनका प्रबल आग्रह देखकर भगवान शंकरजी ने उन्हें वहाँ जाने की अनुमति दे दी। सती ने पिता के घर पहुँचकर देखा कि कोई भी उनसे आदर और प्रेम के साथ बातचीत नहीं कर रहा है। सारे लोग मुँह फेरे हुए हैं। केवल उनकी माता ने स्नेह से उन्हें गले लगाया।
बहनों की बातों में व्यंग्य और उपहास के भाव भरे हुए थे। परिजनों के इस व्यवहार से उनके मन को बहुत क्लेश पहुँचा। उन्होंने यह भी देखा कि वहाँ चतुर्दिक भगवान शंकरजी के प्रति तिरस्कार का भाव भरा हुआ है। दक्ष ने उनके प्रति कुछ अपमानजनक वचन भी कहे। यह सब देखकर सती का हृदय क्षोभ, ग्लानि और क्रोध से संतप्त हो उठा। उन्होंने सोचा भगवान शंकरजी की बात न मान, यहाँ आकर मैंने बहुत बड़ी गलती की है। 

वे अपने पति भगवान शंकर के इस अपमान को सह न सकीं। उन्होंने अपने उस रूप को तत्क्षण वहीं योगाग्नि द्वारा जलाकर भस्म कर दिया। वज्रपात के समान इस दारुण-दुःखद घटना को सुनकर शंकरजी ने क्रुद्ध हो अपने गणों को भेजकर दक्ष के उस यज्ञ का पूर्णतः विध्वंस करा दिया।

सती ने योगाग्नि द्वारा अपने शरीर को भस्म कर अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया। इस बार वे ‘शैलपुत्री’ नाम से विख्यात हुर्ईं। पार्वती, हैमवती भी उन्हीं के नाम हैं। उपनिषद् की एक कथा के अनुसार इन्हीं ने हैमवती स्वरूप से देवताओं का गर्व-भंजन किया था। 

पार्वती और हेमवती भी इसी देवी के अन्य नाम हैं। शैलपुत्री का विवाह भी भगवान शंकर से हुआ। शैलपुत्री शिवजी की अर्द्धांगिनी बनीं। इनका महत्व और शक्ति अनंत है।
ध्यान
वन्दे वांछितलाभाय चन्द्रर्धकृत शेखराम्। वृशारूढ़ा शूलधरां शैलपुत्री यशस्वनीम्॥
पूणेन्दु निभां गौरी मूलाधार स्थितां प्रथम दुर्गा त्रिनेत्राम्॥
पटाम्बर परिधानां रत्नाकिरीटा नामालंकार भूषिता॥
प्रफुल्ल वंदना पल्लवाधरां कातंकपोलां तुग कुचाम्। कमनीयां लावण्यां स्नेमुखी क्षीणमध्यां नितम्बनीम्॥

स्तोत्र पा
प्रथम दुर्गा त्वंहि भवसागर: तारणीम्। धन ऐश्वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यम्॥
त्रिलोजननी त्वंहि परमानंद प्रदीयमान्। सौभाग्यरोग्य दायनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यहम्॥
चराचरेश्वरी त्वंहि महामोह: विनाशिन। मुक्ति भुक्ति दायनीं शैलपुत्री प्रमनाम्यहम्॥
कवच
ओमकार: में शिर: पातु मूलाधार निवासिनी। हींकार: पातु ललाटे बीजरूपा महेश्वरी॥
श्रींकार पातु वदने लावाण्या महेश्वरी । हुंकार पातु हदयं तारिणी शक्ति स्वघृत। फट्कार पात सर्वागे सर्व सिद्धि फलप्रदा॥ 

समस्याएँ

📘📘 *प्रेरक कथा*📕📕

🐪🐪 सौ ऊंट 🐪🐪

किसी शहर में, एक आदमी प्राइवेट कंपनी में जॉब करता था . वो अपनी ज़िन्दगी से खुश नहीं था , हर समय वो किसी न किसी समस्या से परेशान रहता था .

एक बार शहर से कुछ दूरी पर एक महात्मा का काफिला रुका . शहर में चारों और उन्ही की चर्चा थी.

बहुत से लोग अपनी समस्याएं लेकर उनके पास पहुँचने लगे ,
उस आदमी ने भी महात्मा के दर्शन करने का निश्चय किया .

छुट्टी के दिन सुबह -सुबह ही उनके काफिले तक पहुंचा . बहुत इंतज़ार के बाद उसका का नंबर आया .

वह बाबा से बोला ,” बाबा , मैं अपने जीवन से बहुत दुखी हूँ , हर समय समस्याएं मुझे घेरी रहती हैं , कभी ऑफिस की टेंशन रहती है , तो कभी घर पर अनबन हो जाती है , और कभी अपने सेहत को लेकर परेशान रहता हूँ ….

बाबा कोई ऐसा उपाय बताइये कि मेरे जीवन से सभी समस्याएं ख़त्म हो जाएं और मैं चैन से जी सकूँ ?

बाबा मुस्कुराये और बोले , “ पुत्र , आज बहुत देर हो गयी है मैं तुम्हारे प्रश्न का उत्तर कल सुबह दूंगा … लेकिन क्या तुम मेरा एक छोटा सा काम करोगे …?”

“हमारे काफिले में सौ ऊंट 🐪 हैं ,
मैं चाहता हूँ कि आज रात तुम इनका खयाल रखो …
जब सौ के सौ ऊंट 🐪 बैठ जाएं तो तुम भी सो जाना …”,

ऐसा कहते हुए महात्मा👳 अपने तम्बू में चले गए ..

अगली सुबह महात्मा उस आदमी से मिले और पुछा , “ कहो बेटा , नींद अच्छी आई .”

वो दुखी होते हुए बोला :
“कहाँ बाबा , मैं तो एक पल भी नहीं सो पाया. मैंने बहुत कोशिश की पर मैं सभी ऊंटों🐪 को नहीं बैठा पाया , कोई न कोई ऊंट 🐪 खड़ा हो ही जाता …!!!

बाबा बोले , “ बेटा , कल रात तुमने अनुभव किया कि चाहे कितनी भी कोशिश कर लो सारे ऊंट 🐪 एक साथ नहीं बैठ सकते …

तुम एक को बैठाओगे तो कहीं और कोई दूसरा खड़ा हो जाएगा.

इसी तरह तुम एक समस्या का समाधान करोगे तो किसी कारणवश दूसरी खड़ी हो जाएगी ..

पुत्र जब तक जीवन है ये समस्याएं तो बनी ही रहती हैं … कभी कम तो कभी ज्यादा ….”

“तो हमें क्या करना चाहिए ?” , आदमी ने जिज्ञासावश पुछा .

“इन समस्याओं के बावजूद जीवन का आनंद लेना सीखो …

कल रात क्या हुआ ?
1) कई ऊंट 🐪 रात होते -होते खुद ही बैठ गए ,
2) कई तुमने अपने प्रयास से बैठा दिए ,
3) बहुत से ऊंट 🐪 तुम्हारे प्रयास के बाद भी नहीं बैठे … और बाद में तुमने पाया कि उनमे से कुछ खुद ही बैठ गए ….

कुछ समझे ….??

समस्याएं भी ऐसी ही होती हैं..

1) कुछ तो अपने आप ही ख़त्म हो जाती हैं ,
2) कुछ को तुम अपने प्रयास से हल कर लेते हो …
3) कुछ तुम्हारे बहुत कोशिश करने पर भी हल नहीं होतीं ,

ऐसी समस्याओं को समय पर छोड़ दो …
उचित समय पर वे खुद ही ख़त्म हो जाती हैं.!!

जीवन है, तो कुछ समस्याएं रहेंगी ही रहेंगी ….
पर इसका ये मतलब नहीं की तुम दिन रात उन्ही के बारे में सोचते रहो …

समस्याओं को एक तरफ रखो
और जीवन का आनंद लो…

चैन की नींद सो …

जब उनका समय आएगा वो खुद ही हल हो जाएँगी”…

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*बिंदास मुस्कुराओ 😊क्या ग़म है ..*
*ज़िन्दगी में टेंशन😁 किसको कम है …*

*अच्छा या बुरा तो केवल भ्रम है …*
*जिन्दगी का नाम ही कभी ख़ुशी कभी ग़म है ..*

कलाम की बातें

डॉ० एपीजे अब्दुल कलाम की चन्द लाईनें जो हमे जीवन में हमेशा याद रखनी चाहिए। और हो सके तो उसे अमल भी करना चाहिये।
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1. जिदंगी मे कभी भी किसी को
बेकार मत समझना,क्योक़ि
बंद पडी घडी भी दिन में
दो बार सही समय बताती है।

2. किसी की बुराई तलाश करने
वाले इंसान की मिसाल उस
मक्खी की तरह है जो सारे
खूबसूरत जिस्म को छोडकर
केवल जख्म पर ही बैठती है।

3. टूट जाता है गरीबी मे
वो रिश्ता जो खास होता है,
हजारो यार बनते है
जब पैसा पास होता है।

4. मुस्करा कर देखो तो
सारा जहाॅ रंगीन है,
वर्ना भीगी पलको
से तो आईना भी
धुधंला नजर आता है।

5..जल्द मिलने वाली चीजे
ज्यादा दिन तक नही चलती,
और जो चीजे ज्यादा
दिन तक चलती है
वो जल्दी नही मिलती।

6. बुरे दिनो का एक
अच्छा फायदा
अच्छे-अच्छे दोस्त
परखे जाते है।

7. बीमारी खरगोश की तरह
आती है और कछुए की तरह
जाती है;
जबकि पैसा कछुए की तरह
आता है और.खरगोश की
तरह जाता है।

8. छोटी छोटी बातो मे
आनंद खोजना चाहिए
क्योकि बङी बङी तो
जीवन मे कुछ ही होती है।

9. ईश्वर से कुछ मांगने पर
न मिले तो उससे नाराज
ना होना क्योकि ईश्वर
वह नही देता जो आपको
अच्छा लगता है बल्कि
वह देता है जो आपके लिए
अच्छा होता है

10. लगातार हो रही
असफलताओ से निराश
नही होना चाहिए क्योक़ि
कभी-कभी गुच्छे की आखिरी
चाबी भी ताला खोल देती है।

11. ये सोच है हम इसांनो की
कि एक अकेला
क्या कर सकता है
पर देख जरा उस सूरज को
वो अकेला ही तो चमकता है।

12. रिश्ते चाहे कितने ही बुरे हो
उन्हे तोङना मत क्योकि
पानी चाहे कितना भी गंदा हो
अगर प्यास नही बुझा सकता
वो आग तो बुझा सकता है।

13. अब वफा की उम्मीद भी
किस से करे भला
मिटटी के बने लोग
कागजो मे बिक जाते है।

14. इंसान की तरह बोलना
न आये तो जानवर की तरह
मौन रहना अच्छा है।

15. जब हम बोलना
नही जानते थे तो
हमारे बोले बिना’माँ’
हमारी बातो को समझ जाती थी।
और आज हम हर बात पर
कहते है छोङो भी ‘माँ’
आप नही समझोंगी।

16. शुक्र गुजार हूँ
उन तमाम लोगो का
जिन्होने बुरे वक्त मे
मेरा साथ छोङ दिया
क्योकि उन्हे भरोसा था
कि मै मुसीबतो से
अकेले ही निपट सकता हूँ।

17. शर्म की अमीरी से
इज्जत की गरीबी अच्छी है।

18. जिदंगी मे उतार चङाव
का आना बहुत जरुरी है
क्योकि ECG मे सीधी लाईन
का मतलब मौत ही होता है।

19. रिश्ते आजकल रोटी
की तरह हो गए है
जरा सी आंच तेज क्या हुई
जल भुनकर खाक हो जाते।

20. जिदंगी मे अच्छे लोगो की
तलाश मत करो
खुद अच्छे बन जाओ
आपसे मिलकर शायद
किसी की तालाश पूरी हो।

दिल में उतरना

👌👌👌👌🌹

*हथौड़े ने चाभी से पूछा कि मैं तुमसे ज्यादा शक्तिशाली हूँ, लेकिन फिर भी मुझे ताला तोड़ने में बहुत समय लगता है और तुम इतनी छोटी हो फिर भी इतनी आसानी से मजबूत ताला कैसे खोल देती हो!*
*चाभी ने मुस्कुरा कर कहा कि तुम प्रहार करते हो लेकिन मैं ताले के अंतर्मन को छूती हूँ और ताला खुल जाया करता है..!!*

☘ _*आप कितने भी शक्तिशाली हों लेकिन जब तक आप लोगों के दिल में नहीं उतरेंगे तो सम्मान अधूरा है!*_
♻♻🌹