प्रभू का पत्र

प्रभू का पत्र

मेरे प्रिय…
सुबह तुम जैसे ही सो कर उठे, मैं तुम्हारे बिस्तर के पास ही खड़ा था। मुझे लगा कि तुम मुझसे कुछ बात
करोगे। तुम कल या पिछले हफ्ते हुई किसी बात या घटना के लिये मुझे धन्यवाद कहोगे। लेकिन तुम फटाफट चाय पी कर तैयार होने चले गए और मेरी तरफ देखा भी नहीं!!!

फिर मैंने सोचा कि तुम नहा के मुझे याद करोगे। पर तुम इस उधेड़बुन में लग गये कि तुम्हे आज कौन से कपड़े पहनने है!!!

फिर जब तुम जल्दी से नाश्ता कर रहे थे और अपने ऑफिस के कागज़ इक्कठे करने के लिये घर में इधर से उधर दौड़ रहे थे…तो भी मुझे लगा कि शायद अब तुम्हे मेरा ध्यान आयेगा,लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

फिर जब तुमने आफिस जाने के लिए ट्रेन पकड़ी तो मैं समझा कि इस खाली समय का उपयोग तुम मुझसे बातचीत करने में करोगे पर तुमने थोड़ी देर पेपर पढ़ा और फिर खेलने लग गए अपने मोबाइल में और मैं खड़ा का खड़ा ही रह गया।

मैं तुम्हें बताना चाहता था कि दिन का कुछ हिस्सा मेरे साथ बिता कर तो देखो,तुम्हारे काम और भी अच्छी तरह से होने लगेंगे, लेकिन तुमनें मुझसे बात
ही नहीं की…

एक मौका ऐसा भी आया जब तुम
बिलकुल खाली थे और कुर्सी पर पूरे 15 मिनट यूं ही बैठे रहे,लेकिन तब भी तुम्हें मेरा ध्यान नहीं आया।

दोपहर के खाने के वक्त जब तुम इधर-
उधर देख रहे थे,तो भी मुझे लगा कि खाना खाने से पहले तुम एक पल के लिये मेरे बारे में सोचोंगे,लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

दिन का अब भी काफी समय बचा था। मुझे लगा कि शायद इस बचे समय में हमारी बात हो जायेगी,लेकिन घर पहुँचने के बाद तुम रोज़मर्रा के कामों में व्यस्त हो गये। जब वे काम निबट गये तो तुमनें टीवी खोल लिया और घंटो टीवी देखते रहे। देर रात थककर तुम बिस्तर पर आ लेटे।
तुमनें अपनी पत्नी, बच्चों को शुभरात्रि कहा और चुपचाप चादर ओढ़कर सो गये।

मेरा बड़ा मन था कि मैं भी तुम्हारी दिनचर्या का हिस्सा बनूं…

तुम्हारे साथ कुछ वक्त बिताऊँ…

तुम्हारी कुछ सुनूं…

तुम्हे कुछ सुनाऊँ।

कुछ मार्गदर्शन करूँ तुम्हारा ताकि तुम्हें समझ आए कि तुम किसलिए इस धरती पर आए हो और किन कामों में उलझ गए हो, लेकिन तुम्हें समय
ही नहीं मिला और मैं मन मार कर ही रह गया।

मैं तुमसे बहुत प्रेम करता हूँ।

हर रोज़ मैं इस बात का इंतज़ार करता हूँ कि तुम मेरा ध्यान करोगे और
अपनी छोटी छोटी खुशियों के लिए मेरा धन्यवाद करोगे।

पर तुम तब ही आते हो जब तुम्हें कुछ चाहिए होता है। तुम जल्दी में आते हो और अपनी माँगें मेरे आगे रख के चले जाते हो।और मजे की बात तो ये है
कि इस प्रक्रिया में तुम मेरी तरफ देखते
भी नहीं। ध्यान तुम्हारा उस समय भी लोगों की तरफ ही लगा रहता है,और मैं इंतज़ार करता ही रह जाता हूँ।

खैर कोई बात नहीं…हो सकता है कल तुम्हें मेरी याद आ जाये!!!

ऐसा मुझे विश्वास है और मुझे तुम
में आस्था है। आखिरकार मेरा दूसरा नाम…आस्था और विश्वास ही तो है।
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तुम्हारा ईश्वर…👣

प्रेम

एक औरत ने तीन संतों को अपने घर के सामने
देखा। वह उन्हें जानती नहीं थी।

औरत ने कहा –
“कृपया भीतर आइये और भोजन करिए।”

संत बोले – “क्या तुम्हारे पति घर पर हैं?”

औरत – “नहीं, वे अभी बाहर गए हैं।”

संत –“हम तभी भीतर आयेंगे जब वह घर पर
हों।”

शाम को उस औरत का पति घर आया और
औरत ने उसे यह सब बताया।

पति – “जाओ और उनसे कहो कि मैं घर
आ गया हूँ और उनको आदर सहित बुलाओ।”

औरत बाहर गई और उनको भीतर आने के
लिए कहा।

संत बोले – “हम सब किसी भी घर में एक साथ
नहीं जाते।”

“पर क्यों?” – औरत ने पूछा।

उनमें से एक संत ने कहा – “मेरा नाम धन है”

फ़िर दूसरे संतों की ओर इशारा कर के कहा –
“इन दोनों के नाम सफलता और प्रेम हैं।

हममें से कोई एक ही भीतर आ सकता है।

आप घर के अन्य सदस्यों से मिलकर तय कर
लें कि भीतर किसे निमंत्रित करना है।”

औरत ने भीतर जाकर अपने पति को यह सब
बताया।

उसका पति बहुत प्रसन्न हो गया और

बोला –“यदि ऐसा है तो हमें धन को आमंत्रित
करना चाहिए।
हमारा घर खुशियों से भर जाएगा।”

पत्नी – “मुझे लगता है कि हमें सफलता को
आमंत्रित करना चाहिए।”

उनकी बेटी दूसरे कमरे से यह सब सुन रही थी।
वह उनके पास आई और बोली –
“मुझे लगता है कि हमें प्रेम को आमंत्रित करना
चाहिए। प्रेम से बढ़कर कुछ भी नहीं हैं।”

“तुम ठीक कहती हो, हमें प्रेम
को ही बुलाना चाहिए” – उसके माता-पिता ने
कहा।

औरत घर के बाहर गई और उसने संतों से पूछा –
“आप में से जिनका नाम प्रेम है वे कृपया घर में
प्रवेश कर भोजन गृहण करें।”

प्रेम घर की ओर बढ़ चले।

बाकी के दो संत भी उनके
पीछे चलने लगे।

औरत ने आश्चर्य से उन दोनों से पूछा –
“मैंने
तो सिर्फ़ प्रेम को आमंत्रित किया था। आप लोग
भीतर क्यों जा रहे हैं?”

उनमें से एक ने कहा – “यदि आपने धन और
सफलता में से किसी एक को आमंत्रित किया होता
तो केवल वही भीतर जाता।

आपने प्रेम को आमंत्रित किया है।

प्रेम कभी अकेला नहीं जाता।
प्रेम जहाँ-जहाँ जाता है, धन और सफलता
उसके पीछे जाते हैं।

फल

🙏🏻 🙏🏻
माली *प्रतिदिन* पौधों में पानी देता हॆ।
मगर फल🍐सिर्फ
*मौसम* में ही आता हॆ।
इसीलिये जीवन में *धॆर्य* रखें
प्रत्येक चीज अपने *समय* पर होगी
प्रतिदिन *बेहतर* काम करें
समय पर फल जरुर मिलेगा .

जीवन

” *जीवन एक “प्रतिध्वनि” है। यहाँ सब कुछ वापस लौटकर आ जाता है,*
*अच्छा, बुरा, झूठ, सच…।*

*अतः दुनिया को आप सबसे अच्छा देने का प्रयास करें और निश्चित ही सबसे अच्छा आपके पास वापस आएगा *

रस्सी का साँप

एक बार एक दरोगा जी का मुंह लगा नाई पूछ बैठा –

“हुजूर पुलिस वाले रस्सी का साँप कैसे बना देते हैं ?”

दरोगा जी बात को टाल गए।

लेकिन नाई ने जब दो-तीन
बार यही सवाल पूछा तो दरोगा जी ने मन ही मन तय किया कि इस भूतनी वाले को बताना ही पड़ेगा कि रस्सी का साँप कैसे बनाते हैं !

लेकिन प्रत्यक्ष में नाई से बोले – “अगली बार आऊंगा तब
बताऊंगा !”

इधर दरोगा जी के जाने के दो घंटे बाद ही 4 सिपाही नाई
की दुकान पर छापा मारने आ धमके – “मुखबिर से पक्की खबर मिली है, तू हथियार सप्लाई करता है। तलाशी लेनी है दूकान की !”

तलाशी शुरू हुई …

एक सिपाही ने नजर बचाकर हड़प्पा की खुदाई से निकला जंग लगा हुआ असलहा छुपा दिया !

दूकान का सामान उलटने-पलटने के बाद एक सिपाही चिल्लाया – “ये रहा रिवाल्वर”

छापामारी अभियान की सफलता देख के नाई के होश उड़ गए – “अरे साहब मैं इसके बारे में कुछ नहीं जानता ।

आपके बड़े साहब भी मुझे अच्छी तरह पहचानते हैं !”

एक सिपाही हड़काते हुए बोला – “दरोगा जी का नाम लेकर बचना चाहता है ? साले सब कुछ बता दे कि तेरे गैंग में कौन-कौन है … तेरा सरदार कौन है … तूने कहाँ-कहाँ हथियार सप्लाई किये … कितनी जगह लूट-पाट की …
तू अभी थाने चल !”

थाने में दरोगा साहेब को देखते ही नाई पैरों में गिर पड़ा – “साहब बचा लो … मैंने कुछ नहीं किया !”

दरोगा ने नाई की तरफ देखा और फिर सिपाहियों से पूछा – “क्या हुआ ?”

सिपाही ने वही जंग लगा असलहा दरोगा के सामने पेश कर दिया – “सर जी मुखबिर से पता चला था .. इसका गैंग है और हथियार सप्लाई करता है.. इसकी दूकान से ही ये रिवाल्वर मिली है !”

दरोगा सिपाही से – “तुम जाओ मैं पूछ-ताछ करता हूँ !”

सिपाही के जाते ही दरोगा हमदर्दी से बोले – “ये क्या किया तूने ?”

नाई घिघियाया – “सरकार मुझे बचा लो … !”

दरोगा गंभीरता से बोला – “देख ये जो सिपाही हैं न …साले एक नंबर के कमीने हैं …मैंने अगर तुझे छोड़ दिया तो ये साले मेरी शिकायत ऊपर अफसर से कर देंगे …
इन कमीनो के मुंह में हड्डी डालनी ही पड़ेगी …
मैं तुझे अपनी गारंटी पर दो घंटे का समय देता हूँ , जाकर किसी तरह बीस हजार का इंतजाम कर ..
पांच – पांच हजार चारों सिपाहियों को दे दूंगा तो साले मान जायेंगे !”

नाई रोता हुआ बोला – “हुजूर मैं गरीब आदमी बीस हजार कहाँ से लाऊंगा ?”

दरोगा डांटते हुए बोला – “तू मेरा अपना है इसलिए इतना सब कर रहा हूँ तेरी जगह कोई और होता तो तू अब तक जेल पहुँच गया होता …जल्दी कर वरना बाद में मैं कोई मदद नहीं कर पाऊंगा !”

नाई रोता – कलपता घर गया … अम्मा के कुछ चांदी के जेवर थे …चौक में एक ज्वैलर्स के यहाँ सारे जेवर बेचकर किसी तरह बीस हजार लेकर थाने में पहुंचा और सहमते हुए बीस हजार रुपये दरोगा जी को थमा दिए !

दरोजा जी ने रुपयों को संभालते हुए पूछा – “कहाँ से लाया ये रुपया?”

नाई ने ज्वैलर्स के यहाँ जेवर बेचने की बात बतायी तो दरोगा जी ने सिपाही से कहा – “जीप निकाल और नाई को हथकड़ी लगा के जीप में बैठा ले .. दबिश पे चलना है !”

पुलिस की जीप चौक में उसी ज्वैलर्स के यहाँ रुकी !

दरोगा और दो सिपाही ज्वैलर्स की दूकान के अन्दर पहुंचे …

दरोगा ने पहुँचते ही ज्वैलर्स को रुआब में ले लिया – “चोरी का माल खरीदने का धंधा कब से कर रहे हो ?”

ज्वैलर्स सिटपिटाया – “नहीं दरोगा जी आपको किसी ने गलत जानकारी दी है!”
दरोगा ने डपटते हुए कहा – “चुप ~~~ बाहर देख जीप में
हथकड़ी लगाए शातिर चोर बैठा है … कई साल से पुलिस को इसकी तलाश थी … इसने तेरे यहाँ जेवर बेचा है कि नहीं ? तू तो जेल जाएगा ही .. साथ ही दूकान का सारा माल भी जब्त होगा !”

ज्वैलर्स ने जैसे ही बाहर पुलिस जीप में हथकड़ी पहले नाई को देखा तो उसके होश उड़ गए,

तुरंत हाथ जोड़ लिए – “दरोगा जी जरा मेरी बात सुन लीजिये!

कोने में ले जाकर मामला एक लाख में सेटल हुआ !

दरोगा ने एक लाख की गड्डी जेब में डाली और नाई ने जो गहने बेचे थे वो हासिल किये फिर ज्वैलर्स को वार्निंग दी – “तुम शरीफ आदमी हो और तुम्हारे खिलाफ पहला मामला था इसलिए छोड़ रहा हूँ … आगे कोई शिकायत न मिले !”

इतना कहकर दरोगा जी और सिपाही जीप पर बैठ के
रवाना हो गए !

थाने में दरोगा जी मुस्कुराते हुए पूछ रहे थे – “साले तेरे को समझ में आया रस्सी का सांप कैसे बनाते हैं !”

नाई सिर नवाते हुए बोला – “हाँ माई-बाप समझ गया !”

दरोगा हँसते हुए बोला – “भूतनी के ले संभाल अपनी अम्मा के गहने और एक हजार रुपया और जाते-जाते याद कर ले …
हम रस्सी का सांप ही नहीं बल्कि नेवला .. अजगर … मगरमच्छ सब बनाते हैं .. बस असामी बढ़िया होना चाहिए”।
…………….हमारे देश का कटु सत्य

😔
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आदमी और जानवर

एक बन्दर और बन्दरिया के विवाह की वर्षगांठ थी । बन्दरिया बड़ी खुश थी । एक नज़र उसने अपने परिवार पर डाली । तीन प्यारे-प्यारे बच्चे, नाज उठाने वाला साथी, हर सुख-दु:ख में साथ देने वाली बन्दरों की टोली । पर फिर भी मन उदास है । सोचने लगी – “काश ! मैं भी मनुष्य होती तो कितना अच्छा होता ! आज केक काटकर सालगिरह मनाते, दोस्तों के साथ पार्टी करते, हाय ! सच में कितना मजा आता !

बन्दर ने अपनी बन्दरिया को देखकर तुरन्त भांप लिया कि इसके दिमाग में जरुर कोई ख्याली पुलाव पक रहा है । उसने तुरन्त टोका – “अजी, सुनती हो ! ये दिन में सपने देखना बन्द करो । जरा अपने बच्चों को भी देख लो, जाने कहाँ भटक रहे हैं ? मैं जा रहा हूँ बस्ती में, कुछ खाने का सामान लेकर आऊँगा तेरे लिए । आज तुम्हें कुछ अच्छा खिलाने का मन कर रहा है मेरा ।

बन्दरिया बुरा सा मुँह बनाकर चल दी अपने बच्चों के पीछे । जैसे-जैसे सूरज चढ़ रहा था, उसका पारा भी चढ़ रहा था । अच्छे पकवान के विषय में सोचती तो मुँह में पानी आ जाता । “पता नहीं मेरा बन्दर आज मुझे क्या खिलाने वाला है ? अभी तक नहीं आया ।” जैसे ही उसे अपना बन्दर आता दिखा झट से पहुँच गई उसके पास ।

बोली – “क्या लाए हो जी ! मेरे लिए । दो ना, मुझे बड़ी भूख लगी है । ये क्या तुम तो खाली हाथ आ गये !”
बन्दर ने कहा – “हाँ, कुछ नहीं मिला । यहीं जंगल से कुछ लाता हूँ ।” बन्दरिया नाराज होकर बोली – “नहीं चाहिए मुझे कुछ भी । सुबह तो मजनू बन रहे थे, अब साधु क्यों बन गए ?”
बन्दर – “अरी, भाग्यवान ! जरा चुप भी रह लिया कर । पूरे दिन कच-कच करती रहती हो ।”

बन्दरिया – “हाँ-हाँ ! क्यों नहीं, मैं ही ज्यादा बोलती हूँ । पूरा दिन तुम्हारे परिवार की देखरेख करती हूँ । तुम्हारे बच्चों के आगे-पीछे दौड़ती रहती हूँ । इसने उसकी टांग खींची, उसने इसकी कान खींची, सारा दिन झगड़े सुलझाती रहती हूँ ।”

बन्दर – “अब बस भी कर, मुँह बन्द करेगी, तभी तो मैं कुछ बोलूँगा । गया था मैं तेरे लिए पकवान लाने शर्मा जी की छत पर । रसोई की खिड़की से एक आलू का परांठा झटक भी लिया था मैंने । पर तभी शर्मा जी की बड़ी बहू की आवाज़ सुनाई पड़ी . .
*”अरी, अम्मा जी ! अब क्या बताऊँ,* ये और बच्चे नाश्ता कर चुके हैं । मैंने भी खा लिया है और आपके लिए भी एक परांठा रखा था मैंनेपर, खिड़की से बन्दर उठा ले गया । अब क्या करुँ ? फिर से चुल्हा चौंका तो नहीं ना कर सकती मैं । आप देवरानी जी के वहाँ जाकर खा लें ।”

अम्मा ने रुँधाए से स्वर में कहा – “पर, मुझे दवा खानी है, बेटा !” बहू ने तुरन्त पलटकर कहा – तो मैं क्या करुँ ? अम्मा जी ! वैसे भी आप शायद भूल गयीं हैं, आज से आपको वहीं खाना है ।
एक महीना पूरा हो गया है, आपको मेरे यहाँ खाते हुए । देवरानी जी तो शुरु से ही चालाक हैं, वो नहीं आयेंगी आपको बुलाने । पर तय तो यही हुआ था कि *एक महीना आप यहाँ खायेंगी और एक महीना वहाँ ।”* अम्मा जी की आँखों में आँसू थे, वे बोल नहीं पा रहीं थीं । बड़ी बहू फिर बोली – “ठीक है, अभी नहीं जाना चाहती तो रुक जाईये । मैं दो घण्टे बाद दोपहर का भोजन बनाऊँगी, तब खा लीजिएगा, बन्दर ने बन्दरिया से कहा कि “भाग्यवान ! मुझसे यह सब देखा नहीं गया और मैंने परांठा वहीं अम्मा जी के सामने गिरा दिया ।”

बन्दरिया की आँखों से आँसू बहने लगे । उसे अपने बन्दर पर बड़ा गर्व हो रहा था और बोली – “ऐसे घर का अन्न हम नहीं खायेंगे, जहाँ माँ को बोझ समझते हैं ।
*अच्छा हुआ, जो हम इन्सान नहीं हुए । हम जानवर ही ठीक हैं ।”
🙏🏻🙏🏻
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इन्जिनियर

3 इन्जिनियर एक टेढ़े मेढ़े पाइप में से तार डालने कि कोशिश कर रहे थे,😍

एक गांव वाला 5 दिन से ये सब देख रहा था😁
….
5 वें दिन वो बोला:- मै करू साब ??😍
..
वो बोले:- हम 5 दिन से कोशिश कर रहे हैं, हमसे तो हुआ नहीं, तु कैसे निकालेगा ?😛

चल तु भी कोशिश करले…..

गाँव वाला बोला:- ठीक

गाँव वाला खेत मे गया एक चूहा लाया
उसकी पूँछ मे तार बान्धा

🐀चूहे को पाईप मे डाला
🐀चूहा दुसरी तरफ से तार के साथ बाहर निकल गया |😂
..
तब सालो को पता चला
..
डिग्री कि तो कोइ वेल्यु ही नही है। 😂😂😂
.

प्रोफेसर

क्लास रूम में प्रोफेसर ने एक सीरियस टॉपिक पर चर्चा
प्रारंभ की।
.
जैसे ही वे ब्लैकबोर्ड पर कुछ लिखने के लिए पलटे तो तभी
एक शरारती छात्र ने सीटी बजाई।
.
प्रोफेसर ने पलटकर सारी क्लास को घूरते हुए “सीटी
किसने मारी” पूछा,
लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया।
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प्रोफेसर ने शांति से अपना सामान समेटा और आज की
क्लास समाप्त बोलकर, बाहर की तरफ बढ़े।
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स्टूडेंट्स खुश हो गए कि, चलो अब फ्री हैं।
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अचानक प्रोफेसर रुके, वापस अपनी टेबल पर पहुँचे और
बोले—” चलो, मैं तुम्हें एक कहानी सुनाता हूँ ,
इससे हमारे बचे हुए समय का उपयोग भी हो जाएगा। ”
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सभी स्टूडेंट्स उत्सुकता और इंटरेस्ट के साथ कहानी सुनने
लगे।
.
प्रोफेसर बोले—” कल रात मुझे नींद नहीं आ रही
थी तो मैंने सोचा कि, कार में पेट्रोल भरवाकर ले आता हूँ
जिससे सुबह मेरा समय बच जाएगा।
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पेट्रोल पम्प से टैंक फुल कराकर मैं आधी रात को
सूनसान पड़ी सड़कों पर ड्राइव का आनंद लेने लगा।
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अचानक एक चौराहे के कार्नर पर मुझे एक बहुत खूबसूरत
लड़की शानदार ड्रेस पहने हुए अकेली खड़ी नजर आई।
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मैंने कार रोकी और उससे पूछा कि,
क्या मैं उसकी कोई सहायता कर सकता हूँ तो उसने कहा
कि,
उसे उसके घर ड्रॉप कर दें तो बड़ी मेहरबानी होगी।
.
मैंने सोचा नींद तो वैसे भी नहीं आ रही है ,
चलो, इसे इसके घर छोड़ देता हूँ।
.
वो मेरी बगल की सीट पर बैठी।
रास्ते में हमने बहुत बातें कीं।
वो बहुत इंटेलिजेंट थी, ढेरों
टॉपिक्स पर उसका कमाण्ड था।
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जब कार उसके बताए एड्रेस पर पहुँची तो उतरने से
पहले वो बोली कि,
वो मेरे नेचर और व्यवहार से बेहद प्रभावित हुई है और
मुझसे प्यार करने लगी है।
.
मैं खुद भी उसे पसंद करने लगा था।
मैंने उसे बताया कि, ” मैं यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हूँ। ”
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वो बहुत खुश हुई
फिर उसने मुझसे मेरा मोबाइल नंबर लिया और
अपना नंबर दिया।
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अंत में उसने बताया की, उसका भाई भी
यूनिवर्सिटी में ही पढ़ता है और उसने मुझसे
रिक्वेस्ट की कि,
मैं उसके भाई का ख़याल रखूँ।
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मैंने कहा कि, ” तुम्हारे भाई के लिए कुछ भी करने पर
मुझे बेहद खुशी होगी।
क्या नाम है तुम्हारे भाई
का…?? ”
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इस पर लड़की ने कहा कि, ” बिना नाम बताए भी
आप उसे पहचान सकते हैं क्योंकि वो सीटी बहुत
ज्यादा और बहुत बढ़िया बजाता है। ”
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जैसे ही प्रोफेसर ने सीटी वाली बात की तो,
तुरंत क्लास के सभी स्टूडेंट्स उस छात्र की तरफ
देखने लगे, जिसने प्रोफ़ेसर की पीठ पर सीटी
बजाई थी।
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प्रोफेसर उस लड़के की तरफ घूमे और उसे घूरते हुए बोले-
” बेटा, मैंने अपनी पी एच डी की डिग्री,
मटर छीलकर हासिल नहीं की है,
हरामखोर निकल क्लास से बाहर…!!😂😂😂😂😂😂😂
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दादाजी

मास्टर : मोहन , तुम्हारे पड़ोस के दादाजी आजकल दिखाई नही दे रहे हैं ?

मोहन: सर वे गुजर गये ।

मास्टर : अरे , क्या हुआ था उन्हें ?

मोहन : वे TV पर रामदेव बाबा को देखकर योगा कर रहे थे ।

मास्टर : अच्छा , फिर ?

मोहन : बाबा ने निर्देश दिया गहरी सांस अंदर लो और जब मे कहु तब बाहर छोड़ना

मास्टर : अच्छा फिर ?

मोहन : फिर क्या अचानक लाइट चली गयी और तीन घंटे बाद जब लाइट आयी तब तक दादाजी चल बसे थे।

(विद्युत मंडल की जय) 😜😜😀
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* …☕*

*✏संसार में केवल मनुष्य ही ऐसा*
*एक मात्र प्राणी है,*
*जिसे ईश्वर ने*
*हंसने का गुण दिया है,*
*इसे खोईए मत*
*इन्सान तो हर घर में पैदा होते हैं*,
*बस इंसानियत कहीं-कहीं*
*जन्म लेती है..✍*

*🙏😊 😊🙏*

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