सुप्रभात

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*👌💥: एक खूबसूरत सोच :💥👌*
*✍🏻जन्म से ना तो कोई दोस्त पैदा होता है और ना ही दुश्मन, वह तो हमारे घमंड, ताकत या व्यवहार से बनते है।*

*ज़िंदगी को अगर खुल कर जीना है तो थोडा सा झुक कर जियो, तब देखो फिर, ये ईश्वर आपको कितना ऊँचा उठा देंगा..*

*❣दिल से लिखी बातें*
*दिल को छू जाती हैं*

*कुछ लोग मिलकर बदल जाते हैं*
*और*
*कुछ लोगों से मिलकर*
*जिन्दगी बदल जाती है।*
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“सुप्रभात” पर 2 का विचार

  1. पानी में गुड डालिए, बीत जाए जब रात!
    सुबह छानकर पीजिए, अच्छे हों हालात!!
    *धनिया की पत्ती मसल, बूंद नैन में डार!*
    दुखती अँखियां ठीक हों, पल लागे दो-चार!!
    *ऊर्जा मिलती है बहुत, पिएं गुनगुना नीर!*
    कब्ज खतम हो पेट की, मिट जाए हर पीर!!
    *प्रातः काल पानी पिएं, घूंट-घूंट कर आप!*
    बस दो-तीन गिलास है, हर औषधि का बाप!!
    *ठंडा पानी पियो मत, करता क्रूर प्रहार!*
    करे हाजमे का सदा, ये तो बंटाढार!!
    *भोजन करें धरती पर, अल्थी पल्थी मार!*
    चबा-चबा कर खाइए, वैद्य न झांकें द्वार!!
    *प्रातः काल फल रस लो, दुपहर लस्सी-छांस!*
    सदा रात में दूध पी, सभी रोग का नाश!!
    *प्रातः- दोपहर लीजिये, जब नियमित आहार!* तीस मिनट की नींद लो, रोग न आवें द्वार!!
    *भोजन करके रात में, घूमें कदम हजार!*
    डाक्टर, ओझा, वैद्य का , लुट जाए व्यापार !!
    *घूट-घूट पानी पियो, रह तनाव से दूर!*
    एसिडिटी, या मोटापा, होवें चकनाचूर!!
    *अर्थराइज या हार्निया, अपेंडिक्स का त्रास!*
    पानी पीजै बैठकर, कभी न आवें पास!!
    *रक्तचाप बढने लगे, तब मत सोचो भाय!*
    सौगंध राम की खाइ के, तुरत छोड दो चाय!!
    *सुबह खाइये कुवंर-सा, दुपहर यथा नरेश!*
    भोजन लीजै रात में, जैसे रंक सुजीत!!
    *देर रात तक जागना, रोगों का जंजाल!*
    अपच,आंख के रोग सँग, तन भी रहे निढाल^^
    *दर्द, घाव, फोडा, चुभन, सूजन, चोट पिराइ!*
    बीस मिनट चुंबक धरौ, पिरवा जाइ हेराइ!!
    *सत्तर रोगों कोे करे, चूना हमसे दूर!*
    दूर करे ये बाझपन, सुस्ती अपच हुजूर!!
    *भोजन करके जोहिए, केवल घंटा डेढ!*
    पानी इसके बाद पी, ये औषधि का पेड!!
    *अलसी, तिल, नारियल, घी सरसों का तेल!*
    यही खाइए नहीं तो, हार्ट समझिए फेल!
    *पहला स्थान सेंधा नमक, पहाड़ी नमक सु जान!*
    श्वेत नमक है सागरी, ये है जहर समान!!
    *अल्यूमिन के पात्र का, करता है जो उपयोग!*
    आमंत्रित करता सदा, वह अडतालीस रोग!!
    *फल या मीठा खाइके, तुरत न पीजै नीर!*
    ये सब छोटी आंत में, बनते विषधर तीर!!
    *चोकर खाने से सदा, बढती तन की शक्ति!*
    गेहूँ मोटा पीसिए, दिल में बढे विरक्ति!!
    *रोज मुलहठी चूसिए, कफ बाहर आ जाय!*
    बने सुरीला कंठ भी, सबको लगत सुहाय!!
    *भोजन करके खाइए, सौंफ, गुड, अजवान!*
    पत्थर भी पच जायगा, जानै सकल जहान!!
    *लौकी का रस पीजिए, चोकर युक्त पिसान!*
    तुलसी, गुड, सेंधा नमक, हृदय रोग निदान!
    *चैत्र माह में नीम की, पत्ती हर दिन खावे !*
    ज्वर, डेंगू या मलेरिया, बारह मील भगावे !!
    *सौ वर्षों तक वह जिए, लेते नाक से सांस!*
    अल्पकाल जीवें, करें, मुंह से श्वासोच्छ्वास!!
    *सितम, गर्म जल से कभी, करिये मत स्नान!*
    घट जाता है आत्मबल, नैनन को नुकसान!!
    *हृदय रोग से आपको, बचना है श्रीमान!*
    सुरा, चाय या कोल्ड्रिंक, का मत करिए पान!!
    *अगर नहावें गरम जल, तन-मन हो कमजोर!*
    नयन ज्योति कमजोर हो, शक्ति घटे चहुंओर!!
    *तुलसी का पत्ता करें, यदि हरदम उपयोग!*
    मिट जाते हर उम्र में,तन में सारे रोग।
    ||सर्वे भवन्तु सुखिनः||

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