चीन की चाल

*बिना एक गोली चलाये जीत जाएगा चीन*

टाइटल पर यकीन नही होगा , लेकिन पूरा लेख पढ़ने के बाद आंखे चौड़ी नही होंगी बल्कि फट जाएंगी।

*चीन की थ्योरी क्या है*
युद्ध की स्तिथि में किसी भी देश का पूरा ध्यान सीमा की सुरक्षा पर रहता है, और अगर उस देश के अंदर भीषण पैमाने पर अराजकता, नागरिकों को असुरक्षित या जान का नुकसान पहुचाया जाए तो किसी भी देश की सरकार प्राथमिकता पहले आंतरिक सुरक्षा और जान माल के नुकसान को रोकने की होती है। इसी थ्योरी पर कई साल पहले से ही चीन काम कर चुका है।
*हुआ कब*
वास्तव में चीन ने इसकी तैयारी 4-5 साल पहले शुरू कर दी थी, जब उसने मिसाइल से उपग्रह को सफलतापूर्वक नष्ट करने की क्षमता हासिल कर ली थी। उस मिशन की सफलता पार्टी चल रही थी और पार्टी के दौरान चीनी एक गुप्त मीटिंग में राष्ट्रपति, अत्यंत वरिष्ठ रक्षा विशेषज्ञ , वित्त मंत्री एक मिशन की रूपरेखा बना रहे थे कि बिना लड़े ही युद्ध कैसे जीत जा सकता है। इस मिशन का प्रारम्भिक बजट 9 खरब
(900 अरब ) रुपये रखा गया।
*मिशन क्या है*
इस मिशन का उद्देश्य उपग्रह द्वारा संचार तरंगों द्वारा भेजकर किसी विस्फोटक को नियंत्रित और उसमें विस्फोट कराने की क्षमता और तकनीक विकसित करना था, इस तकनीक को चीन ने करीब 2 साल में डेवलप कर लिया था।
*तकनीक का इस्तेमाल कैसे होगा*
इस तकनीक का इस्तेमाल में 2 महत्वपूर्ण चीजें हैँ, पहला विस्फोटक और दूसरा उसका उपग्रह से सतत संपर्क।
काफी बड़े पैमाने पर उपग्रह या संचार तरंगों के संपर्क में रहने वाली एक ही चीज है वो है मोबाइल।
चीन ने मोबाइल की बैटरी में कुछ खुफिया रसायनों का इस्तेमाल किया है और मोबाइल सीक्रेट प्रोग्राम फीड किया है जो कि एक विशेष निर्देश मिलने पर बैटरी को ब्लास्ट कर देगा।
*चीनी रणनीति*
तकनीक को सफलतापूर्वक विकसित करने के बाद चीन दबाव और लालच देकर मोबाइल निर्माता कंपनियों के मालिकों को मिलाकर इस तकनीक को मोबाइल में डाल के बेच रहा है। जितना ज्यादा mAh की बैटरी उतना ही घातक विस्फोटक प्रभाव।
*आक्रामक बिक्री*
इस रणनीति के तहत चीन की योजना दूसरे देशों में ज्यादा से ज्यादा मोबाइल बेचने की है , ताकि कभी भी बहुत ही ज्यादा पैमाने पर नागरिकों को नुकसान पहुचाया जा सके।
जो high end मोबाइल Samsung, Apple और LG जैसी कंपनियां 25- 30 हजार में दे रही है वो मोबाइल चीनी कंपनियां मात्र 8-10 हजार में इसलिए नही दे रही हैं कि वो बहुत कम मुनाफा कमा रही हैं बल्कि इसलिए दे रही हैं कि उनको चीनी सरकार बहुत तगड़ा पैसा दे रही है।
*रणनीतिक और युद्ध की स्तिथि में प्रभाव*
अब इसके व्यापक प्रभाव पर नजर डालिए। पिछले 3 साल से चीनी कम्पनियो ने सस्ते दाम पर करीब 2 करोड़ मोबाइल भारतीयों की जेब मे डाल दिये हैं। जो उपग्रह संचार से चीनी खुफिया उच्च कार्यालय की निगरानी में हैं।
एक निर्देश देकर चीन 2 करोड़ विस्फोट भारत मे करने की क्षमता पा चुका है। आप खुद सोचिये की चीनी कम्पनियों के सबसे ज्यादा फोकस मोबाइल ही बेचने पर क्यो है ? वो TV , फ्रिज या वासिंग मशीन बेचने पर ज्यादा ध्यान क्यो नही दे रही हैं ? क्योकि उनपर निरंतर संचार उपग्रह से नियंत्रण असम्भव ही है।

अब अगर भारत और चीन का युद्ध होगा और चीन ने मोबाइल्स को विस्फ़ोट कर दिया तो करीब 2 करोड़ लोग घायल हो जाएंगे, और कई मृत्यु भी होंगी।
इतनी बड़ी संख्या में एक साथ कोई भी देश युद्ध के आपातकाल तो क्या नार्मल समय मे भी चिकित्सा सुविधा नही दे पायेगा। इस स्तिथि में देश के नागरिक अराजकता पर आ जाएंगे और सरकार को आंतरिक सुरक्षा और देश की सीमा सुरक्षा की भारी जिम्मेदारी एक साथ आएगी । बाहरी दुश्मन को मारना आसान है पर अपने ही घायल, पीड़ित और उपद्रवी नागरिकों पर सरकार कैसे नियंत्रण कर पायेगी ? इस दोहरे युद्ध मे पहले देश हारेगा फिर नागरिक चीनी गुलाम बन जाएंगे।
अब भी आपको शायद यकीन नही आएगा, शायद अब यकीन आ जाये
3 साल पहले से ही हमेशा चीन में ही निर्मित या असेंबल्ड मोबाइल्स में विस्फोट क्यो हो रहे हैं और कोई भी मोबाइल चीन में क्यो नही फटता है ?
वास्तव में समय समय पर चीन अपने नियंत्रण सिस्टम को चेक करने के लिए कुछ अत्यंत सीमित निर्देश संचारित करता है, जो मोबाइल में विस्फोट के करते हैं।

*क्या चीन ऐसा कर सकता है*
बेशक ।
वो देश जो अपने ही नागरिकों टैंक से भी उड़वा सकता है, वो दुश्मन देश के नागरिकों को अपना हथियार बनाने से भला क्यों पीछे हटने लगा।
ये राज हमेशा राज ही रहता अगर एक उच्च चीनी रक्षा अधिकारी ने नशे की हालत में एक अपनी एक महिला मित्र को उगला न होता, वास्तव में वो महिला चीन विरोधी देश के एक सीक्रेट जासूसी मिशन पर थी।

*अब करना क्या है*
ये आप पर और बच्चों के पालकों पर निर्भर करता है कि उनको करना क्या है।
अपने विवेक का अच्छे से इस्तेमाल करके सोचिये, लोगो से चर्चा कीजिये और उचित निर्णय लीजिये ।

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