इस्टालीन

जोज़फ इस्टालिन एक बार अपने साथ संसद में एक मुर्गा लेकर आये,

और सबके सामने उसका एक-एक पंख नोचने लगे,

मुर्गा दर्द से बिलबिलाता रहा मगर,

एक-एक करके इस्टालिन ने सारे पंख नोच दिये,

फिर मुर्गे को फर्श पर फेंक दिया,

फिर जेब से कुछ दाने निकालकर मुर्गे की तरफ फेंक दिए और चलने लगा,

तो मुर्गा दाना खाता हुआ इस्टालिन के पीछे चलने लगा,

इस्टालिन बराबर दाना फेंकता गया और मुर्गा बराबर दाना मु्ँह में ड़ालता हुआ उसके पीछे चलता रहा।

आखिरकार वो मुर्गा इस्टालिन के पैरों में आ खड़ा हुआ।

इस्टालिन स्पीकर की तरफ देखा और एक तारीख़ी जुमला बोला,

“लोकतांत्रिक देशों की जनता इस मुर्गे की तरह होती है,

उनके हुकमरान जनता का पहले सब कुछ लूट कर उन्हें अपाहिज कर देते हैं,

और बाद में उन्हें थोड़ी सी खुराक देकर उनका मसीहा बन जाते हैं.

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