आत्महत्या महापाप है

World Suicide Prevention Day (विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस)

आत्महत्या महापाप है….

अक्सर जीवन के दुःख ओर असफलताओं से दुःखी होकर कई लोग आत्महत्या का मार्ग चुन लेते है, एसे लोग समझते है कि आत्महत्या कर लेने से उन्हे समस्त दुःखो से मुक्ति मिल जायेगी।

ऐसा सोचना बिल्कुल गलत है, क्यो कि मानव जीवन मे दुख ओर सुख पिछले जन्म मे किये गये कर्मो के फल स्वरूप ही प्राप्त होते है।

संतजन कहते हैं की अगर कोई आत्महत्या कर लेता है तो उसकि आत्मा पृथ्वी पर उतने समय तक भटकती है जितनी भगवान ने उसकी आयु लिखी थी, वह प्रेत बनकर अनेक भयानक कष्टों को भोगता है।

आत्महत्या करने वाले मनुष्य को जब भी आगे भगवान कि इच्छा से जन्म मिलेगा तब उसे पिछले जन्म मे मिल रहे उन दुख ओर परेशानियो को पुनः भोगना होगा जिनसे बचने के लिये उसने पिछले जन्म मे आत्महत्या का मार्ग चुना था, तथा उसमे आत्महत्या का पाप कर्म ओर जुड जायेगा।

कर्म का फल भोगना ही पडता है, गीता मे भगवान श्रीकृष्ण कि उक्ति है :- ‘ अवश्यमेव भोक्तव्यं कृताकर्म शुभाशुभम् ‘
अर्थात:- शुभ और अशुभ कर्मो का फल अवश्य भोगना पडता है।

पाप और कर्म फल से मुक्ति के लिये भी भगवान ने गीता मे बहुत ही सरल मार्ग भी बताया है।

भगवान कहते है की:- “तू मेरी शरण में आजा, मैं तुझे समस्त पापो से मुक्त करके मोक्ष प्रदान करूँगा।”

दुख ओर परेशानियो से मुक्ति भगवान के सिवाय ओर कोइ नही दे सकता, अतः जीवन मे जो दुख ओर कष्ट मिल रहा है उन्हे भोगते हुये यह सोचकर प्रसन्न रहो कि मेरे पूर्वजन्म में किये गये पाप नष्ट हो रहे है, इस पाप को हमने ही कमाया है और नष्ट भी हम ही करेंगे।