स्कूली प्रार्थनाएँ

ऐ मालिक तेरे बंदे हम
ऐसे हो हमारे करम
नेकी पर चलें
और बदी से टलें
ताकि हंसते हुये निकले दम

जब ज़ुलमों का हो सामना
तब तू ही हमें थामना
वो बुराई करें
हम भलाई भरें
नहीं बदले की हो कामना
बढ़ उठे प्यार का हर कदम
और मिटे बैर का ये भरम
नेकी पर चलें

ये अंधेरा घना छा रहा
तेरा इनसान घबरा रहा
हो रहा बेखबर
कुछ न आता नज़र
सुख का सूरज छिपा जा रहा
है तेरी रोशनी में वो दम
जो अमावस को कर दे पूनम
नेकी पर चलें

बड़ा कमज़ोर है आदमी
अभी लाखों हैं इसमें कमीं
पर तू जो खड़ा
है दयालू बड़ा
तेरी कृपा से धरती थमी
दिया तूने हमें जब जनम
तू ही झेलेगा हम सबके ग़म
नेकी पर चलें
.

तुम ही हो माता पिता तुम्ही हो

तुम ही बंधू , सखा तुम्ही हो

तुम्ही हो साथी तुम ही सहारे

कोई न अपना सिवाए तुम्हारे

तुम्ही हो नैया तुम्ही खिवैया

तुम ही हो बंधू सखा तुम्ही हो …

जो खिल सके न वो फूल हम हैं

तुम्हारे चरणों की धुल हम हैं

दया की दृष्टि सदा ही रखना

तुम ही हो बंधू सखा तुम ही हो…

हम को मन की शक्ति देना ,मन विजय करें

दूसरो की जय से पहले ,ख़ुद को जय करें …..

भेद भाव अपने दिल से साफ कर सकें

दोस्तों से भूल हो तो माफ़ कर सके…….

झूठ से बचे रहें, सच का दम भरें….

दूसरो की जय से पहले ख़ुद को जय करें….

हमको मन की शक्ति देना …..

मुश्किलें पड़े तो हम पे, इतना कर्म कर

साथ दें तो धर्म का चलें तो धर्म पर…..

ख़ुद पर हौसला रहें बदी से न डरें….

दूसरो की जय से पहले ख़ुद को जय करें….

हमको मन की शक्ति देना …..

दूसरो की जय से पहले ख़ुद को जय करें….

हमको मन की शक्ति देना …..

ओ पालनहारे, निर्गुण और न्यारे

तुमरे बिन हमरा कौनो नाहीं….

हमरी उलझन सुलझाओ भगवन

तुमरे बिन हमरा कौनो नाहीं….

तुम्ही हमका हो संभाले

तुम्ही हमरे रखवाले

तुमरे बिन हमरा कौनो नाहीं…

चन्दा मैं तुम ही तो भरे हो चांदनी

सूरज मैं उजाला तुम ही से

यह गगन हैं मगन, तुम ही तो दिए इसे तारे

भगवन, यह जीवन तुम ही न सवारोगे

तो क्या कोई सवारे

ओ पालनहारे ……

जो सुनो तो कहे प्रभुजी हमरी है विनती

दुखी जन को धीरज दो

हारे नही वो कभी दुखसे

तुम निर्बल को रक्षा दो

रहें पाए निर्बल सुख से

भक्ति दो शक्ति दो

जग के जो स्वामी हो, इतनी तो अरज सुनो

हैं पथ मैं अंधियारे

देदो वरदान मैं उजियारे

ओ पालन हरे ……

 

हर देश में तू हर भेष में तू,
तेरे नाम अनेक,  तू एक है..
तेरी रंग भूमि, यह विश्व धरा.
सब खेल में मेल में तू ही तू है..
सागर से उठा बदल बनके,
बदल से फुटा जल हो करके.
फिर नहर बनी नदिया गहरी.
तेरे भिन्न प्रकार तू एक ही है..
चिन्टी से अणु परमाणु बना,
सब जीव जगत का रूप लिया.
कहीं पर्वत वृक्ष विशाल बना.
सोंदर्य तेरा तू एक ही है.
यह दिव्य दिखाया है जिसने,
वह है गुरुदेव की पूर्ण दया.
तुकड्या कहे और न कोई दिखा
बस मैं और तू सब एक ही है..