स्वास्थ्य की बातें

🎉🎉🎉🎉🎉🎉🎉
आरोग्यम्* –

✅ *सोने के बाद ऐसे उठें*

✏1. अपनी दायीं तरफ घूमें
जब आप उठें, तो अपनी दायीं तरफ घूमें और फिर बिस्तर से बाहर आएं, क्योंकि नींद से उठते समय मेटाबोलिक प्रक्रिया बहुत धीमी होती है। ऐसे में अचानक से बिस्तर छोड़ने पर दिल पर दबाव पड़ेगा।

✏2. अपने हाथों को मसलें
सुबह बिस्तर से उठने से पहले अपने हाथों को मसलें और अपनी हथेलियों को अपनी आँखों पर लगाएं। हथेलियों को मसलने से हाथों में स्थित सभी नाड़ियां सक्रीय हो जाती हैं और आपका सिस्टम जल्दी से सजग हो जाता है।

✏3. मुस्कुराएं
सुबह उठ कर मुस्कुराएं! किसे देख कर? किसी को नहीं! क्योंकि आपका सुबह उठना अपने आप में एक बड़ी बात है। लाखों ऐसे लोग हैं जो कल रात सोये और आज सुबह नहीं उठे, लेकिन आप और मैं सुबह उठ गए। क्या यह बड़ी बात नहीं है? इसलिए मुस्कुराएं।

✏ “`सोने की सही और गलत दिशा“`
आपका दिल आपके शरीर विज्ञान का एक अहम पहलू है। वह स्टेशन जो शरीर में जीवन भरता है, जो अगर न हो, तो कुछ नहीं होता, आपके बाईं ओर से शुरू होता है। भारत में हमेशा यह संस्कृति रही है कि जागने के बाद आपको अपने दाहिनी ओर करवट लेकर फिर बिस्तर छोड़ना चाहिए। जब आपका शरीर आराम की एक खास अवस्था में होता है, तो उसकी मेटाबोलिक क्रिया धीमी हो जाती है। जब आप जागते हैं, तो शरीर अचानक सक्रिय हो जाता है। इसलिए आपको अपने दाहिनी ओर करवट लेकर फिर उठना चाहिए क्योंकि कम मेटाबोलिक सक्रियता में अगर आप अचानक बाईं करवट लेते हैं तो आप अपने दिल के तंत्र पर दबाव डालेंगे।

✏ “`नींद से उठने के बाद यह करें“`
पारंपरिक रूप से आपसे यह भी कहा जाता है कि सुबह उठने से पहले आपको अपनी हथेलियां रगड़नी चाहिए और अपनी हथेलियों को अपनी आंखों पर रखना चाहिए। कहा जाता है कि ऐसा करने पर आपको भगवान दिख सकते हैं। इसका संबंध भगवान के दिखने से नहीं है।
आपके हाथों में नाड़ियों का एक भारी जाल है। अगर आप अपनी हथेलियां रगड़ते हैं, तो सभी नाड़ियां सक्रिय हो जाती हैं और शरीर तत्काल सजग हो जाता है। सुबह जगने पर भी अगर आप सुस्त महसूस करते हैं, तो ऐसा करके देखिए, आपका पूरा शरीर तत्काल सजग हो जाएगा। तत्काल आपकी आंखों और आपकी इंद्रियों के दूसरे पहलुओं से जुड़ी सारी नाड़ियां सजग हो जाती हैं। शरीर को हिलाने से पहले आपका शरीर और दिमाग दोनों सक्रिय होने चाहिए। आपको सुस्त नहीं उठना चाहिए, इसका उद्देश्य यही है।
🎉🎉🎉🎉🎉🎉🎉

हँसो और हँसाओ

*हँसो और हँसाओ*
एक महिला तीन बच्चों के साथ बस में यात्रा कर रही थी।

कंडक्टर:- मैडम इन बच्चों का टिकिट लगेगा, उम्र बताओ?

महिला:- पहले वाले की दो साल, दूसरे वाले की ढाई साल और तीसरे की तीन साल।

कंडक्टर:- मैडम टिकिट चाहे मत लो, पर गैप तो 9 महीने का रखो।

महिला:- कर्मफूटे,
बीच वाला जेठानी का है,
तू टिकिट काट,ज्ञान मत बाँट।
😜😜😜😜😜😜😜😜

सोच का फर्क

एक बार श्री कृष्ण और अर्जुन भ्रमण पर निकले तो उन्होंने मार्ग में एक निर्धन ब्राहमण को भिक्षा मागते देखा….

अर्जुन को उस पर दया आ गयी और उन्होंने उस ब्राहमण को स्वर्ण मुद्राओ से भरी एक पोटली दे दी।

जिसे पाकर ब्राहमण प्रसन्नता पूर्वक अपने सुखद भविष्य के सुन्दर स्वप्न देखता हुआ घर लौट चला।

किन्तु उसका दुर्भाग्य उसके साथ चल रहा था, राह में एक लुटेरे ने उससे वो पोटली छीन ली।

ब्राहमण दुखी होकर फिर से भिक्षावृत्ति में लग गया।अगले दिन फिर अर्जुन की दृष्टि जब उस ब्राहमण पर पड़ी तो उन्होंने उससे इसका कारण पूछा।

ब्राहमण ने सारा विवरण अर्जुन को बता दिया, ब्राहमण की व्यथा सुनकर अर्जुन को फिर से उस पर दया आ गयी अर्जुन ने विचार किया और इस बार उन्होंने ब्राहमण को मूल्यवान एक माणिक दिया।

ब्राहमण उसे लेकर घर पंहुचा उसके घर में एक पुराना घड़ा था जो बहुत समय से प्रयोग नहीं किया गया था,ब्राह्मण ने चोरी होने के भय से माणिक उस घड़े में छुपा दिया।

किन्तु उसका दुर्भाग्य, दिन भर का थका मांदा होने के कारण उसे नींद आ गयी… इस बीच
ब्राहमण की स्त्री नदी में जल लेने चली गयी किन्तु मार्ग में
ही उसका घड़ा टूट गया, उसने सोंचा, घर में जो पुराना घड़ा पड़ा है उसे ले आती हूँ, ऐसा विचार कर वह घर लौटी और उस पुराने घड़े को ले कर
चली गई और जैसे ही उसने घड़े
को नदी में डुबोया वह माणिक भी जल की धारा के साथ बह गया।

ब्राहमण को जब यह बात पता चली तो अपने भाग्य को कोसता हुआ वह फिर भिक्षावृत्ति में लग गया।

अर्जुन और श्री कृष्ण ने जब फिर उसे इस दरिद्र अवस्था में देखा तो जाकर उसका कारण पूंछा।

सारा वृतांत सुनकर अर्जुन को बड़ी हताशा हुई और मन ही मन सोचने लगे इस अभागे ब्राहमण के जीवन में कभी सुख नहीं आ सकता।

अब यहाँ से प्रभु की लीला प्रारंभ हुई।उन्होंने उस ब्राहमण को दो पैसे दान में दिए।

तब अर्जुन ने उनसे पुछा “प्रभु
मेरी दी मुद्राए और माणिक
भी इस अभागे की दरिद्रता नहीं मिटा सके तो इन दो पैसो से
इसका क्या होगा” ?

यह सुनकर प्रभु बस मुस्कुरा भर दिए और अर्जुन से उस
ब्राहमण के पीछे जाने को कहा।

रास्ते में ब्राहमण सोचता हुआ जा रहा था कि “दो पैसो से तो एक व्यक्ति के लिए भी भोजन नहीं आएगा प्रभु ने उसे इतना तुच्छ दान क्यों दिया ? प्रभु की यह कैसी लीला है “?

ऐसा विचार करता हुआ वह
चला जा रहा था उसकी दृष्टि एक मछुवारे पर पड़ी, उसने देखा कि मछुवारे के जाल में एक
मछली फँसी है, और वह छूटने के लिए तड़प रही है ।

ब्राहमण को उस मछली पर दया आ गयी। उसने सोचा”इन दो पैसो से पेट की आग तो बुझेगी नहीं।क्यों? न इस मछली के प्राण ही बचा लिए जाये”।

यह सोचकर उसने दो पैसो में उस मछली का सौदा कर लिया और मछली को अपने कमंडल में डाल लिया। कमंडल में जल भरा और मछली को नदी में छोड़ने चल पड़ा।

तभी मछली के मुख से कुछ निकला।उस निर्धन ब्राह्मण ने देखा ,वह वही माणिक था जो उसने घड़े में छुपाया था।

ब्राहमण प्रसन्नता के मारे चिल्लाने लगा “मिल गया, मिल गया ”..!!!

तभी भाग्यवश वह लुटेरा भी वहाँ से गुजर रहा था जिसने ब्राहमण की मुद्राये लूटी थी।

उसने ब्राह्मण को चिल्लाते हुए सुना “ मिल गया मिल गया ” लुटेरा भयभीत हो गया। उसने सोंचा कि ब्राहमण उसे पहचान गया है और इसीलिए चिल्ला रहा है, अब जाकर राजदरबार में उसकी शिकायत करेगा।

इससे डरकर वह ब्राहमण से रोते हुए क्षमा मांगने लगा। और उससे लूटी हुई सारी मुद्राये भी उसे वापस कर दी।

यह देख अर्जुन प्रभु के आगे नतमस्तक हुए बिना नहीं रह सके।

अर्जुन बोले,प्रभु यह कैसी लीला है? जो कार्य थैली भर स्वर्ण मुद्राएँ और मूल्यवान माणिक नहीं कर सका वह आपके दो पैसो ने कर दिखाया।

श्री कृष्णा ने कहा “अर्जुन यह अपनी सोंच का अंतर है, जब तुमने उस निर्धन को थैली भर स्वर्ण मुद्राएँ और मूल्यवान माणिक दिया तब उसने मात्र अपने सुख के विषय में सोचा। किन्तु जब मैनें उसको दो पैसे दिए। तब उसने दूसरे के दुःख के विषय में सोचा। इसलिए हे अर्जुन-सत्य तो यह है कि, जब आप दूसरो के दुःख के विषय में सोंचते है, जब आप दूसरे का भला कर रहे होते हैं, तब आप ईश्वर का कार्य कर रहे होते हैं, और तब ईश्वर आपके साथ होते हैं।

सीखो

⚡⚡🌩⛈🌧🌦☁⚡⚡

*कर्मों की आवाज़*
*शब्दों से भी ऊँची होती है…!*
*”दूसरों को नसीहत देना*
*तथा आलोचना करना*
*सबसे आसान काम है।*
*सबसे मुश्किल काम है*
*चुप रहना और*
*आलोचना सुनना…!!”*
*यह आवश्यक नहीं कि*
*हर लड़ाई जीती ही जाए।*
*आवश्यक तो यह है कि*
*हर हार से कुछ सीखा जाए*

6 बातें

*6 छोटी-छोटी कहानियाँ*

( 1 )

*एक बार गाँव वालों ने यह निर्णय लिया कि बारिश ☔के लिए ईश्वर से प्रार्थना🙏 करेंगे , प्रार्थना के दिन सभी गाँव वाले एक जगह एकत्रित हुए , परन्तु एक बालक🙇 अपने साथ छाता 🌂भी लेकर आया ।*
👇

*🔔 इसे कहते हैं 🔔*
*🎄 आस्था🎄*

🌾
( 2 )

*👶जब आप एक बच्चे को हवा में उछालते हैं तो वह हँसता 😀 है , क्यों कि वह जानता है कि आप उसे पकड़ लेंगे ।*
👇

*🐾इसे कहते हैं🐾*
*✌ विश्वास✌*

🌾
( 3 )

*🌜प्रत्येक रात्रि को जब हम सोने के लिए जाते हैं तब इस बात की कोई गारण्टी नहीं है कि सुबह☀ तक हम जीवित रहेंगे भी कि नहीं , फिर भी हम घड़ी ⏰ में अलार्म लगाकर सोते हैं ।*
👇
*💡इसे कहते हैं*
*🌞आशा(उम्मीद)🌞*

🌾
( 4 )

*हमें भविष्य के बारे में कोई जानकारी नहीं है फिर भी हम आने वाले कल के लिए बड़ी बड़ी योजनाएं बनाते हैं ।*

👇
*👉 इसे कहते हैं👈*
*💪 आत्मविश्वास💪*
—————————————
🌾
( 5 )
*💞 हम देखरहे हैं कि दुनियाँ कठिनाइयों से जूझरही है फिर भी हम शादी 🎎 करते हैं ।*
👇
*🎵 इसे कहते हैं 🎵*
*💘 प्यार 💘*

🌾
( 6 )

*👍 एक 60 साल की उम्र वाले व्यक्ति की शर्ट पर एक शानदार वाक्य लिखा था , “मेरी उम्र 60 साल नहीं है , मैं तो केवल मधुर – मधुर 16 साल का हूँ , 44 साल के अनुभव के साथ ।”*

👇
*👊 इसे कहते हैं 👊*
*👀 नज़रिया 👀*
—————

*जीवन खूबसूरत है , इसे सर्वोत्तम के लिए जियो।*

*संसार में केवल मनुष्य ही ऐसा एकमात्र प्राणी है*
*जिसे ईश्वर ने हंसने का गुण दिया है, इसे खोईए मत.*

*”बिखरने दो होंठों पे हंसी के फुहारों को*
*दोस्तों,*
*प्यार से बात कर लेने से जायदाद कम नहीं होती है*

*इन्सान तो हर घर में पैदा होते हैं….!!*
*बस इंसानियत कहीं-कहीं जन्म लेती है.*

इस्टालीन

जोज़फ इस्टालिन एक बार अपने साथ संसद में एक मुर्गा लेकर आये,

और सबके सामने उसका एक-एक पंख नोचने लगे,

मुर्गा दर्द से बिलबिलाता रहा मगर,

एक-एक करके इस्टालिन ने सारे पंख नोच दिये,

फिर मुर्गे को फर्श पर फेंक दिया,

फिर जेब से कुछ दाने निकालकर मुर्गे की तरफ फेंक दिए और चलने लगा,

तो मुर्गा दाना खाता हुआ इस्टालिन के पीछे चलने लगा,

इस्टालिन बराबर दाना फेंकता गया और मुर्गा बराबर दाना मु्ँह में ड़ालता हुआ उसके पीछे चलता रहा।

आखिरकार वो मुर्गा इस्टालिन के पैरों में आ खड़ा हुआ।

इस्टालिन स्पीकर की तरफ देखा और एक तारीख़ी जुमला बोला,

“लोकतांत्रिक देशों की जनता इस मुर्गे की तरह होती है,

उनके हुकमरान जनता का पहले सब कुछ लूट कर उन्हें अपाहिज कर देते हैं,

और बाद में उन्हें थोड़ी सी खुराक देकर उनका मसीहा बन जाते हैं.

संगठन

👌 शानदार बात👌

झाड़ू जब तक एक सूत्र में बँधी होती है, तब तक वह “कचरा” साफ करती है।

लेकिन वही झाड़ू जब बिखर जाती है, तो खुद कचरा हो जाती है।

इस लिये, हमेशा संगठन से बंधे रहें , बिखर कर कचरा न बनें।

नमस्कार

🌻🌻🌻🌻🌻
*नेक लोगों की संगत से*
*हमेशा भलाई ही मिलती हे,*
*क्योंकि….*
*हवा जब फूलो से गुज़रती हे,*
*तो वो भी खुश्बुदार हो जाती हे.*
*🌞शुभ प्रभात🌞*
🍁🍁🍁🍁

अधिकारी

एक राजा था। उसने दस खूंखार जंगली कुत्ते पाल रखे थे।

उसके दरबारियों और मंत्रियों से जब कोई मामूली सी भी गलती हो जाती तो वह उन्हें उन कुत्तों को ही खिला देता।

एक बार उसके एक विश्वासपात्र सेवक से एक छोटी सी भूल हो गयी,

राजा ने उसे भी उन्हीं कुत्तों के सामने डालने का हुक्म सुना दिया।

उस सेवक ने उसे अपने दस साल की सेवा का वास्ता दिया,

मगर राजा ने उसकी एक न सुनी।

फिर उसने अपने लिए दस दिन की मोहलत माँगी जो उसे मिल गयी।

अब वह आदमी उन कुत्तों के रखवाले और सेवक के पास गया

और उससे विनती की कि वह उसे दस दिन के लिए अपने साथ काम करने का अवसर दे।

किस्मत उसके साथ थी, उस रखवाले ने उसे अपने साथ रख लिया।

दस दिनों तक उसने उन कुत्तों को खिलाया, पिलाया, नहलाया, सहलाया और खूब सेवा की।

आखिर फैसले वाले दिन राजा ने जब उसे उन कुत्तों के सामने फेंकवा दिया तो वे उसे चाटने लगे, उसके सामने दुम हिलाने और लोटने लगे।

राजा को बड़ा आश्चर्य हुआ।

उसके पूछने पर उस आदमी ने बताया कि महाराज इन कुत्तों ने मेरी मात्र दस दिन की सेवा का इतना मान दिया

बस महाराज ने वर्षों की सेवा को एक छोटी सी भूल पर भुला दिया।

राजा को अपनी गलती का अहसास हो गया।

और उसने उस आदमी को तुरंत

.. .

भूखे मगरमच्छों के सामने डलवा दिया।

सीख:- आखिरी फैसला अधिकारियों का ही होता है उसपर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता…

सरकारी कर्मचारियों को समर्पित😃😃😃😃👌👌😃😃😊

मायका

“मायका”
*
गर्मी की छुट्टियों में सुमन मायके आयी और बाहें फैलाकर एक लंबी साँस लेकर बोली वाह मां……यहां आते ही एक सुकून सा मिलता है….
………..जैसे जी भर के खुली हवा में साँस लेने को मिलती है मां……. दिलो दिमाग से एक वज़न सा हट जाता है….और वहां बस सारा दिन देवेश मुझे टोकते रहते हैं थोड़ा धीरे बोलो, तेज़ आवाज़ में मत हँसो….पापा सुन लेंगे….किचन में काम करते करते गुनगुनाने पर भी प्रतिबंध…..
और तो और वहाँ तो ऐसी गर्मी में भी बस साडी ही पहनो और यहां ……न पहनने का कोई प्रतिबन्ध….. न खाने का…. यहीं आकर लगता है कि हाँ अब वो जिंदगी जी रहे हैं जो जीना चाहते हैं….
*
फिर ज़रा रुकते हुए वो गले का थूक गटकते हुए थोड़ा भावुक होकर बोली ‘मां ज्यादा कुछ तो नहीं चाहा था न मैंने?…..पर छोटी छोटी खुशियों को भी तरस जाती हूँ वहाँ….बस हर वक़्त फालतू की रोक टोक, ढंग से किये गए काम में भी जबर्दस्ती की नुक्ताचीनी करना ये मेरी सासु जी की आदत बन चुकी है बस कमियां निकालकर मेरी शिकायतें देवेश से किया करतीं हैं और स्नेह के नाम पर दो मीठे शब्द उनके मुंह से कभी नहीं निकले मेरे लिए।
…………पर यहां आकर लगता है कोई सच में हमारी परवाह करता है।
पता है मां ? बहुत याद आती है आपकी जब मैं बीमार होती हूँ तो …..जब यहां सर दर्द होता है तो आप सिरहाने बैठ कर सर दबाती है,कहती हो आ तेरे सर में घी मसल दूँ दर्द कम हो जायेगा….और वहां तो जैसे किसी को फर्क ही नहीं पड़ता कि मुझे बुखार है या सर दर्द बस अपना काम चाहिए उन्हें तो…..बुखार में भी किचन में ही लगी रहती हूँ सासु जी तो आराम करने तक की नहीं कहती ….हाँ देवेश जरूर कहते हैं….पर वो भी उनकी माँ की नाराज़गी के कारण ज्यादा कुछ नहीं बोलते…..
*
मां ….भाभी कहाँ है?……..यहीं है !
सो रही है महारानी अभी तक…..’अरी कुसुम उठ और जाकर चाय बना दे, देख सुमन कब की आयी है और तुझे कोई होश ही नहीं,घोड़े बेच कर सो रही है जैसे…..
भाभी….भाभी….
‘हाँ सुमन दीदी…. आयी…. अरे सॉरी मुझे तो पता ही नहीं चला आप कब आयी ज़रा सी आंख लग गयी थी’..’.मैं अभी चाय बनाती हूँ आप बैठो’…
अरे भाभी ! आपको तो बुखार है !
भैया भाभी को हॉस्पिटल दिखा कर लाओ उन्हें बुखार है।
मां चाय मैं ही बना कर पी लेती हूँ।
*
“अरे गोली ले लेगी यहीं ,हो जायेगा ठीक…
हम तो इसकी उम्र में कितना काम करते थे बुखार वगैरह की तो कभी परवाह ही नहीं की” सुमन की मां बोल उठी……
*
‘नहीं मां’……ये तो इस घर की धुरी हैं….इनकी वैसी ही परवाह करोगी जैसी मेरी करती हो तो ये घर सुखी और सधा हुआ रहेगा।…….सुमन ये बोलती हुई चाय बनाने चल दी।
इधर …… कुसुम की आँखों में सुमन के लिए श्रद्धा के भाव आंसू बन कर टपक पड़े।