कहानी तीन दोस्तों की

🌹🌹 कहानी तीन बेस्ट दोस्तों की
😌😌😌
ज्ञान , धन
और
विश्वास
तीनों बहुत अच्छे दोस्त
भी थे
तीनों में बहुत प्यार
भी था
एक वक़्त आया
जब
तीनों को
जुदा होना पड़ा
तीनों ने एक दुसरे से
सवाल किया
कि
हम कहाँ मिलेंगे
ज्ञान ने कहा
मैं
मंदिर , विद्यालय
मैं
मिलूँगा
धन ने कहा
मैं
अमीरों के पास मिलूँगा
विश्वास
चुप था
दोनों ने चुप होने की
वजह पुछी
तो
विश्वास ने
रोते हुवे कहा
मैं
एक बार चला ग़या
तो
फिर कभी नही
मिलूँगा

जीवणों दौरो होग्यो- राजस्थानी कविता

जीवणों दौरो होग्यो
———————–
घणां पालिया शौक जीवणों दोरो होग्यो रे
देवे राम नें दोष जमानों फौरो होग्यो रे

च्यारानां री सब्जी ल्यांता आठानां री दाल
दोन्यूं सिक्का चाले कोनीं भूंडा होग्या हाल
च्यार दिनां तक जान जींमती घी की भेंती धार
एक टेम में छींकां आवे ल्याणां पडे उधार
जीवणों दोरो———————————–

मुंडे मूंड बात कर लेंता नहीं लागतो टक्को
बिनां कियां रिचार्ज रुके है मोबाईल रो चक्को
लालटेन में तेल घालता रात काटता सारी
बिजली रा बिल रा झटका सूं आंख्यां आय अंधारी
जीवणों दोरो—————————————-

लाड कोड सुं लाडी ल्यांता करती घर रो काम
पढी लिखी बिनणिंयां बैठी दिनभर करै आराम
घाल पर्स में नोट बीनणीं ब्यूटी पारलर जावे
बैल बणें घाणीं रो बालम परणीं मोज उडावे
जीवणों दौरो—————————————-

टी वी रा चक्कर में टाबर भूल्या खाणों पीणों
चौका छक्का रा हल्ला में मुश्किल होग्यो जीणों
बिल माथै बिल आंता रेवे कोई दिन जाय नीं खाली
लूंण तेल शक्कर री खातर रोज लडै घरवाली
जीवणों दौरो—————————————–

एक रुपैयो फीस लागती पूरी साल पढाई
पाटी बस्ता पोथी का भी रुप्या लागता ढाई
पापाजी री पूरी तनखा एडमिशन में लागे
फीस किताबां ड्रेसां न्यारी ट्यूशन रा भी लागे
जीवणों दौरो—————————————-

सुख री नींद कदै नीं आवे टेंशन ऊपर टैंशन
दो दिन में पूरी हो ज्यावे तनखा हो या पैंशन
गुटखां रा रेपर बिखरयोडा थांरी हंसी उडावे
रोग लगेला साफ लिख्यो पणं दूणां दूणां खावे
जीवणों दौरो————————————–
पैदल चलणों भूली दुनियां गाडी ऊपर गाडी
आगे बैठे टाबर टींगर लारै बैठे लाडी
मैडम केवे पीवर में म्हें कदै नीं चाली पाली
मन में सोचे साब गला में केडी आफत घाली
जीवणों दोरो————————————–

चाऐ पेट में लडै ऊंदरा पेटरोल भरवावे
मावस पूनम राखणं वाला संडे च्यार मनावे
होटलां में करे पार्टी डिस्को डांस रचावे
नशा पता में गेला होकर घर में राड मचावे
जीवणों दौरो ——————————————

अंगरेजी री पूंछ पकडली हिंदी कोनीं आवे
कोका कोला पीवे पेप्सी छाछ राब नहीं भावे
कीकर पडसी पार मुंग्याडो नितरो बढतो जावे
सुख रा साधन रा चक्कर में दुखडा बढता जावे
जितरी चादर पांव पसारो मन पर काबू राखो
गजानंद भगवान भज्यां ही भलो होवसी थांको
जीवणों दौरो होग्यो रे
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इंजीनियरिंग छात्र

एक इंजीनियरिंग स्टूडेंट छत पर खड़ा था…

तभी पड़ोस के अंकल:
‘तो बेटा अब आगे क्या सोचा है’.?

स्टूडेंट:
“बस अंकल, टंकी भरते ही, मोटर बंद कर दूंगा”..

बेटी व माँ

एक गरीब परिवार में एक सुन्दर सी बेटी👰 ने जन्म लिया..

बाप दुखी हो गया बेटा पैदा होता तो कम से कम काम में तो हाथ बटाता,,
उसने बेटी को पाला जरूर,
मगर दिल से नही….

वो पढने जाती थी तो ना ही स्कूल की फीस टाइम से जमा करता,
और ना ही कापी किताबों पर ध्यान देता था…
अक्सर दारू पी कर घर में कोहराम मचाता था……..

उस लडकी की मॉ बहुत अच्छी व बहुत भोली भाली थी वो अपनी बेटी को बडे लाड प्यार से रखती थी..
वो पति से छुपा-छुपा कर बेटी की फीस जमा करती
और कापी किताबों का खर्चा देती थी..
अपना पेट काटकर फटे पुराने कपडे पहन कर गुजारा कर लेती थी,
मगर बेटी का पूरा खयाल रखती थी…

पति अक्सर घर से कई कई दिनों के लिये गायब हो जाता था.

जितना कमाता था दारू मे ही फूक देता था…

वक्त का पहिया घूमता गया




बेटी धीरे-धीरे समझदार हो गयी..
दसवीं क्लास में उसका एडमीसन होना था.
मॉ के पास इतने पैसै ना थे जो बेटी का स्कूल में दाखिला करा पाती..
बेटी डरडराते हुये पापा से बोली:
पापा मैं पढना चाहती हूं मेरा हाईस्कूल में एडमीसन करा दीजिए मम्मी के पास पैसै नही है…
बेटी की बात सुनते ही बाप आग वबूला हो गया और चिल्लाने लगा बोला: तू कितनी भी पड लिख जाये तुझे तो चौका चूल्हा ही सम्भालना है क्या करेगी तू ज्यादा पड लिख कर..

उस दिन उसने घर में आतंक मचाया व सबको मारा पीटा

बाप का व्यहार देखकर बेटी ने मन ही मन में सोच लिया कि अब वो आगे की पढाई नही करेगी….
एक दिन उसकी मॉ बाजार गयी

बेटी ने पूछा:मॉ कहॉ गयी थी
मॉ ने उसकी बात को अनसुना करते हुये कहा :
बेटी कल मै तेरा स्कूल में दाखिला कराउगी
बेटी ने कहा: नही़ं मॉ मै अब नही पडूगी मेरी वजह से तुम्हे कितनी परेशानी उठानी पडती है पापा भी तुमको मारते पीटते हैं कहते कहते रोने लगी..
मॉ ने उसे सीने से लगाते हुये कहा: बेटी मै बाजार से कुछ रुपये लेकर आयी हूं मै कराउगी तेरा दखिला..
बेटी ने मॉ की ओर देखते हुये पूछा: मॉ तुम इतने पैसै कहॉसे लायी हो??
मॉ ने उसकी बात को फिर अनसुना कर दिया…

वक्त वीतता गया



“मॉ ने जी तोड मेहनत करके बेटी को पढाया लिखाया
बेटी ने भी मॉ की मेहनत को देखते हुये मन लगा कर दिन रात पढाई की
और आगे बडती चली गयी…….
“”””
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“”””””””””
इधर बाप दारू पी पी कर बीमार पड गया
डाक्टर के पास ले गये
डाक्टर ने कहा इनको टी.बी. है
“””
“””””
एक दिन तबियत ज्यादा गम्भीर होने पर बेहोशी की हालत में अस्पताल में भर्ती कराया..
दो दिन बाद उस जबे होश आया तो डाक्टरनी का चेहरा देखकर उसके होश उड गये😳😳
वो डाक्टरनी कोई और नही वल्कि उसकी

अपनी बेटी थी..

शर्म से पानी पानी बाप
कपडे से अपना चेहरा छुपाने लगा
और रोने लगा हाथ जोडकर बोला: बेटी मुझे माफ करना मैं तुझे समझ ना सका…

दोस्तों बेटी 💎आखिर बेटी होती है
,,,,,,,,
बाप को रोते 😥देखकर बेटी ने बाप को गले लगा लिया..

“”””””
दोस्तों गरीबी और अमीरी से कोई फर्क नहीं पडता,,
अगर इन्सान का इरादा हो तो आसमान में भी छेद हो सकता है

किसी ने खूब कहा //

“कौन कहता है कि आसमान मे छेद नही हो सकता,,
अरे एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों”

“””

एक दिन बेटी माँ से बोली: माँ तुमने मुझे आजतक नहीं बताया कि मेरे हाईस्कूल के एडमीसन के लिये पैसै कहाँ से लायी थी??

बेटी के बार बार पूछने पर
माँ ने जो बात बतायी
उसे सुनकर
बेटी की रूह काँप गयी….

माँ ने अपने शरीर का खून बेच कर बेटी का एडमीसन कराया था….

दोस्तों तभी तो मॉ को भगवान का दर्जा दिया गया है
माँ जितना औलाद के लिये त्याग कर सकती है
उतना दुनियाँ में कोई और नही..

दो पंक्तियाँ माँ के लिये::::
गोदी में मुझको सुलाया है माँ ने,,
बडे प्यार से अपनी मीठी जुवॉ से,
बेटा कह कर बुलाया है माँ ने,,
मुझको लेके अपनी नरम बाजुओं मे,
मोहब्बत का झूला झुलाया है माँ ने,,
सभी जख्म अपने सीने पे लेके,
हर चोट से बचाया है माँ ने,,
कभी मेरे माथे पे काला टीका लगा के,
यूं बचपन में मुझको सजाया है माँ ने,,
यूं चेहरा दिखा के मुझे रोज अपना,
मुझे मेरे रव से मिलाया है माँ ने,,
ऐ इन्सॉ तू जो इतना इतरा के चलता है,
काबिल तुझे इसके बनाया है माँ ने,, 

👶👦👧👨/////////

सबसे बडा प्रेम

एक औरत ने तीन संतों को अपने घर के सामने
देखा। वह उन्हें जानती नहीं थी।

औरत ने कहा –
“कृपया भीतर आइये और भोजन करिए।”

संत बोले – “क्या तुम्हारे पति घर पर हैं?”

औरत – “नहीं, वे अभी बाहर गए हैं।”

संत –“हम तभी भीतर आयेंगे जब वह घर पर
हों।”

शाम को उस औरत का पति घर आया और
औरत ने उसे यह सब बताया।

पति – “जाओ और उनसे कहो कि मैं घर
आ गया हूँ और उनको आदर सहित बुलाओ।”

औरत बाहर गई और उनको भीतर आने के
लिए कहा।

संत बोले – “हम सब किसी भी घर में एक साथ
नहीं जाते।”

“पर क्यों?” – औरत ने पूछा।

उनमें से एक संत ने कहा – “मेरा नाम धन है”

फ़िर दूसरे संतों की ओर इशारा कर के कहा –
“इन दोनों के नाम सफलता और प्रेम हैं।

हममें से कोई एक ही भीतर आ सकता है।

आप घर के अन्य सदस्यों से मिलकर तय कर
लें कि भीतर किसे निमंत्रित करना है।”

औरत ने भीतर जाकर अपने पति को यह सब
बताया।

उसका पति बहुत प्रसन्न हो गया और

बोला –“यदि ऐसा है तो हमें धन को आमंत्रित
करना चाहिए।
हमारा घर खुशियों से भर जाएगा।”

पत्नी – “मुझे लगता है कि हमें सफलता को
आमंत्रित करना चाहिए।”

उनकी बेटी दूसरे कमरे से यह सब सुन रही थी।
वह उनके पास आई और बोली –
“मुझे लगता है कि हमें प्रेम को आमंत्रित करना
चाहिए। प्रेम से बढ़कर कुछ भी नहीं हैं।”

“तुम ठीक कहती हो, हमें प्रेम
को ही बुलाना चाहिए” – उसके माता-पिता ने
कहा।

औरत घर के बाहर गई और उसने संतों से पूछा –
“आप में से जिनका नाम प्रेम है वे कृपया घर में
प्रवेश कर भोजन गृहण करें।”

प्रेम घर की ओर बढ़ चले।

बाकी के दो संत भी उनके
पीछे चलने लगे।

औरत ने आश्चर्य से उन दोनों से पूछा –
“मैंने
तो सिर्फ़ प्रेम को आमंत्रित किया था। आप लोग
भीतर क्यों जा रहे हैं?”

उनमें से एक ने कहा – “यदि आपने धन और
सफलता में से किसी एक को आमंत्रित किया होता
तो केवल वही भीतर जाता।

आपने प्रेम को आमंत्रित किया है।

प्रेम कभी अकेला नहीं जाता।
प्रेम जहाँ-जहाँ जाता है, धन और सफलता
उसके पीछे जाते हैं।

अच्छा लगे तो प्रेम के साथ रहें, 💖💖

प्रेम बाटें, प्रेम दें और प्रेम लें

क्यों कि प्रेम ही
सफल जीवन का राज है।

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

शेखावाटी सुयस

*शेखावाटी सुयस*

#माचा उपर सोवे सोडियो
तकियो सोवे खोली मै,
हूंको पीतो सोवे चौधरी
बैठ्यो घर की पोली मै।

#चूल्हा सार सोवे चीमटो
भ्हारी सोवे कुणै मै,
गायां रो ग्वालो सोवे
गाय चरातो चूणे मै।

#गीत गाती सोवे बामणी
बैठी घर के गोखा पर,
बूडी ठेरी चोखी लागै
ब्या शादी के मौका पर।

#राजा रै घर राणी सोवे
लाट साहब घर लाटणी,
मार काछडो सिटा तोडै
चोखी लागै जाटणी।

#जैसी चाय छणै कपडा मै
वैसी छणै नही जाली मै,
प्लेट मे रोटी खाओ भलांई
मजो आवै थाली मै।

#चोखो लागे पहलवान
कसरत करतो अखाडा मै,
नणद भौजाई चोखी लागै
छडी तोडती बाडा मै।

#रण्डवां ताणी फागण चौखो
बिनणीयां ने भादूडो,
दाम धडाधड कूट्यो छोरो
चोखो लागे बादूडो।

#साग बेचती मालण सोवै
चूडो बेचती मणीहारी,
सिर पर दौगड लिया कूऐ पर
जाती सोवै पणीहारी।

#छोडा छोलतो खाती सोवै
कुम्हार सोवै गधी पर,
मार पालथी कलम चलातो
बाण्यो सोवै गद्दी पर।

#गाय ठाण मै चोखी लागे
साँण्ड पिजंरा पोल मै,
नार होणी चावै गुणवंती
के राख्यो है डोल मै।

#नाक मै कांटो कान मै बाली
सोवै बोरलो मिंडी मै,
देवी देवता चोखा लागै
मन्दिर और परिण्डी मै।

आँख लाज सूं भरयां चालती
चोखी लागै सुलक्षणी,
चटक मटक कर दांत काडती
फिरै गलियां मै कुलक्षणी।

#आमां पर कोयलडी सोवै
बागां सोवै मोरडी,
काड घूंघटो झालो देवै
चोखी लागै गोरडी।

#चोखो लागै पूर गूदडा
ताऊ जद जाडो आवै,
पूत कपूत और खोटो पीसो
ओडी मै आडो आवै।

#जद पोतो जनमै दादा री
बूढी नाड करै लटखो,
दादीजी ने चोखो लागै
हिंजडा रो ताली पटको।

#नान्यो चोखो लागै आंगण
मायं चलातो गाडूल्यो,
जापायत ने चोखो लागै
अजवायन रो लाडूडो।

#बाबाजी ने चेली चोखी
लागे चेलो चेली ने,
सेठाणी से ज्यादा चोखी
तेलण लागै तेली नै।।

 

माँ – एक कविता

लेती नहीं दवाई “माँ”,

जोड़े पाई-पाई “माँ”।

दुःख थे पर्वत, राई “माँ”,
हारी नहीं लड़ाई “माँ”।

इस दुनियां में सब मैले हैं,
किस दुनियां से आई “माँ”।

दुनिया के सब रिश्ते ठंडे,
गरमागर्म रजाई “माँ” ।

जब भी कोई रिश्ता उधड़े,
करती है तुरपाई “माँ” ।

बाबू जी तनख़ा लाये बस,
लेकिन बरक़त लाई “माँ”।

बाबूजी थे सख्त मगर ,
माखन और मलाई “माँ”।

बाबूजी के पाँव दबा कर
सब तीरथ हो आई “माँ”।

नाम सभी हैं गुड़ से मीठे,
मां जी, मैया, माई, “माँ” ।

सभी साड़ियाँ छीज गई थीं,
मगर नहीं कह पाई “माँ” ।

घर में चूल्हे मत बाँटो रे,
देती रही दुहाई “माँ”।

बाबूजी बीमार पड़े जब,
साथ-साथ मुरझाई “माँ” ।

रोती है लेकिन छुप-छुप कर,
बड़े सब्र की जाई “माँ”।

लड़ते-लड़ते, सहते-सहते,
रह गई एक तिहाई “माँ” ।

बेटी रहे ससुराल में खुश,
सब ज़ेवर दे आई “माँ”।

“माँ” से घर, घर लगता है,
घर में घुली, समाई “माँ” ।

बेटे की कुर्सी है ऊँची,
पर उसकी ऊँचाई “माँ” ।

दर्द बड़ा हो या छोटा हो,
याद हमेशा आई “माँ”।

घर के शगुन सभी “माँ” से,
है घर की शहनाई “माँ”।

सभी पराये हो जाते हैं,
होती नहीं पराईll मां |

अहंकार

*”मंनुष्य कितना भी गोरा क्यों ना हो*
*परंतु*
*उसकी परछाई सदैव काली होती है…!!*
*”मैं श्रेष्ठ हूँ” यह आत्मविश्वास है*
*लेकिन*
*”सिर्फ मैं ही श्रेष्ठ हूँ” यह अहंकार है…”*
*”इच्छा पूरी नहीं होती तो क्रोध बढ़ता है, और इच्छा पूरी होती है तो लोभ बढ़ता है। इसलिये जीवन की हर स्थिति में धैर्य बनाये रखना ही श्रेष्ठता है |*

🌺🍂💐🌻

सुभ प्रभात

*मानव कितने भी प्रयत्न कर ले*
*अंधेरे में छाया*
*बुढ़ापे में काया*
*और*
*अंत समय मे माया*
*किसी का साथ नहीं देती*
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कर्म करो तो फल मिलता है,
आज नहीं तो कल मिलता है।
जितना गहरा अधिक हो कुँआ,
उतना मीठा जल मिलता है ।
जीवन के हर कठिन प्रश्न का,
जीवन से ही हल मिलता है।

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“”सदा मुस्कुराते रहिये””
🌹👌🏻👌🏻🌹

सरकारी स्कूल

*सरकारी स्कूल*
सुन ले पिंकी-बबलू-राजू
सुन ले ——-प्यारे रमेश !
अबकी बार —-लेना तुम
सरकारी स्कूलों में प्रवेश !!

निशुल्क मिलते कपड़े यहाँ
निशुल्क — स्वादिष्ट भोजन !
उच्च योग्यताधारी विशेषज्ञ
पढ़ाते यहाँ पर —- गुरुजन !!

छात्रवृत्ति – गणवेश मिलती
मिलती है पात्र को साइकिल !
हर परीक्षा — निशुल्क होती
नहीं देना पड़ता — कोई बिल !!

साफ – सुथरा माहौल यहाँ
और पृथक-पृथक शौचालय !
बड़े-बड़े मैदान है – रखते
ये ——- सरकारी विद्यालय !!

होती — स्वस्थ प्रतियोगिता
नहीं कभी –किसी की निंदा !
आजादी — इतनी मिलती है
जैसे नभ में उड़े — “परिंदा” !!

पैसा कुछ भी खर्च ना होगा
ना होगा कोई – घर में क्लेश !
अबकी बार —- लेना तुम
सरकारी स्कूलों में — प्रवेश !!
🌇