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ॐ नमः शिवाय !
शिवजी की महिमा से सम्बंधित कुछ पेज बनाये गए हैं, आशा है आपको पसंद आएंगे.
shivji

1.शिवजी की आरती
2.शिवचालीसा
3.शिव भजन
4.शिवजी विशेष भजनमाला
5.शिवजी के चित्र
6.सोमनाथ
7.महाकालेश्वर
8..मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग
9.ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग
10.केदारनाथ
11.भीमाशंकर
12.विश्वनाथ ज्योतिर्लिग
13.बाबा वैद्यनाथ
14.त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग
15.नागेश्वर ज्योतिर्लिंग
16.रामेश्वर धाम
17.घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग

विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग


विश्वनाथ ज्योतिर्लिग

वाराणसी को बनारस तथा काशी के नाम से भी जाना जाता है, यह उत्तर प्रदेश राज्य का प्रमुख शहर है । पवित्र गंगा नदी के किनारे स्थित इस शहर का हिंदुओं के लिए अत्यंत धार्मिक महत्त्व है । वाराणसी में भगवान शिवजी का विश्वनाथ मंदिर है जहां बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग स्थापित है । ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर का अनेक बार निर्माण हुआ। नवीनतम संरचना जो आज यहां स्थापित है उसका निर्माण 18 वीं शताब्दीमें हुआ था।
सहस्त्रों धार्मिक यात्री यहां पवित्र ज्योतिर्लिंग के दर्शन हेतु एवं अभिषेक के लिए यहां एकत्रित होते हैं, गंगा नदी के जलसे शिवजी को अभिषेक किया जाता है । इसके धार्मिक महत्त्व के अतिरिक्त यह मंदिर वास्तुकला की दृष्टि से भी अनुपम है । इसका भव्य प्रवेशद्वार दर्शनीय है । इंदौरकी रानी अहिल्या बाई होलकर को स्वप्नमें भगवान शिवजी के दर्शन हुए । उन्होंने 1780 में यह मंदिर निर्मित कराया । यह मंदिर दशाश्वमेध घाट और गोदुलिया के बीच मणिकर्णिका घाट के दक्षिण और पश्चिम तक नदी की उत्तर दिशा में वाराणसी के  मध्य में स्थित है । यह पूरा क्षेत्र दर्शन योग्य है जहां अनेक मठ दिखाई देते हैं । विश्वनाथ गली तक पहुंचते हुए यह विश्वनाथ मंदिर "सभी के भगवान'' माने जाते हैं शिखर पर स्वर्ण लेपन होनेके कारण इसे स्वर्ण मंदिर भी कहते हैं । परिसरके भीतर, एक अत्यंत अनोखे प्रकार के द्वारसे पहुंचा जाता है.

विश्वनाथ ज्योतिर्लिग

यह भारत का सबसे महत्त्वपूर्ण शिवलिंग है । यह चिकने काले पत्थरसे बना हुआ है । इसे ठोस चांदी के आधारमें रखा गया है । यहां भक्तजन आकर संकल्प करते हैं । पंचतीर्थ यात्रा आरंभ करने से पहले अपने मन की भावना यहां व्यक्त करते हैं । वाराणसी में घाटों और गंगा नदी के अतिरिक्त मंदिर में स्थापित शिवलिंग वाराणसी का धार्मिक आकर्षण बना हुआ है ।यह मंदिर पिछले कई हजारों वर्षों से वाराणसी में स्थित है।
काशी विश्‍वनाथ मंदिर का हिंदू धर्म में एक विशिष्‍ट स्‍थान है। ऐसा माना जाता है कि एक बार इस मंदिर के दर्शन करने और पवित्र गंगा में स्‍नान कर लेने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस मंदिर में दर्शन करने के लिए आदि शंकराचार्य, सन्त एकनाथ रामकृष्ण परमहंस, स्‍वामी विवेकानंद, महर्षि दयानंद, गोस्‍वामी तुलसीदास सभी का आगमन हुआ हैं। यहीं पर सन्त एकनाथजीने वारकरी सम्प्रदाय का महान ग्रन्थ श्रीएकनाथी भागवत लिखकर पुरा किया और काशिनरेश तथा विद्वतजनो द्वारा उस ग्रन्थ की हाथी पर शोभायात्रा खुब धुमधामसे निकाली गयी । श्री विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद के काशी नगर में अवस्थित है। कहते हैं, काशी तीनों लोकों में न्यारी नगरी है, जो भगवान शिव के त्रिशूल पर विराजती है। इसे आनन्दवन, आनन्दकानन, अविमुक्त क्षेत्र तथा काशी आदि अनेक नामों से स्मरण किया गया है। काशी साक्षात सर्वतीर्थमयी, सर्वसन्तापहरिणी तथा मुक्तिदायिनी नगरी है। निराकार महेश्वर ही यहाँ भोलानाथ श्री विश्वनाथ के रूप में साक्षात अवस्थित हैं।
इस काशी क्षेत्र में स्थित श्री दशाश्वमेध, श्री लोलार्क, श्री बिन्दुमाधव, श्री केशव और श्री मणिकर्णिक ये पाँच प्रमुख तीर्थ हैं, जिनके कारण इसे ‘अविमुक्त क्षेत्र’ कहा जाता है। काशी के उत्तर में ओंकारखण्ड, दक्षिण में केदारखण्ड और मध्य में विश्वेश्वरखण्ड में ही बाबा विश्वनाथ प्रसिद्ध है। ऐसा सुना जाता है कि मन्दिर की पुन: स्थापना आदि जगत गुरु शंकरचार्य जी ने अपने हाथों से की थी। श्री विश्वनाथ मन्दिर को मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब ने नष्ट करके उस स्थान पर मस्जिद बनवा दी थी, जो आज भी विद्यमान है। इस मस्जिद के परिसर को ही 'ज्ञानवाणी' कहा जाता है। प्राचीन शिवलिंग आज भी 'ज्ञानवाणी' कहा जाता है।

विश्वनाथ ज्योतिर्लिग
वर्तमान मंदिर का निर्माण महारानी अहिल्या बाई होल्कर द्वारा सन 1780 में करवाया गया था। बाद में महाराजा रणजीत सिंह द्वारा 1853 में 1000 कि.ग्रा शुद्ध सोने द्वारा मढ़्वाया गया था। काशी में अनेक विशिष्ट तीर्थ हैं, जिनके विषय में लिखा है– विश्वेशं माधवं ढुण्ढिं दण्डपाणिं च भैरवम्। वन्दे काशीं गुहां गंगा भवानीं मणिकर्णिकाम्।। अर्थात ‘विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग बिन्दुमाधव, ढुण्ढिराज गणेश, दण्डपाणि कालभैरव, गुहा गंगा (उत्तरवाहिनी गंगा), माता अन्नपूर्णा तथा मणिकर्णिक आदि मुख्य तीर्थ हैं।
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